साभार-पंडित हेमचंद्र वशिष्ठ वेंकटेश मंदिर-बिल्सी (बदायूँ)
नया साल 2021 की शुरुआत होने ही वाली है. इसके साथ ही लोगों को अपनी ग्रह दशा जानने में भी दिलचस्पी होती है. आपको बता दें शनि को न्याय का देवता कहा गया है. शनि भगवान के ग्रह चाल का असर लोगों की जिंदगी में देखने को मिलता है. चाहे वो शनि की साढेसाती हो या फिर ढैय्या, लोगों को इन दोनों स्थिति में सावधान रहने की जरुरत रहती है. वैसे साल 2021 की शुरुआत में ही ग्रहों की स्थिति में काफी बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. लेकिन कुछ ग्रहों के साथ योग संयोग बनाकर अपना शुभ और प्रतिकूल फल प्रदान करेंगे.
ऐसे में शनि जो 2020 की जनवरी से मकर में चल रहे हैं वह किन-किन राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव बनकर उनके जीवन में में उथल-पुथल की स्थिति बनाए रखेंगे. साल की शुरुआत में शनि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होंगे, जिसका स्वामी सूर्य ग्रह को कहा जाता है और 22 जनवरी को श्रवण नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे. इसके बाद शनि देव का उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्रों में गोचर होगा. 2021 में शनि नक्षत्र परिवर्तन के आधार पर जातकों फल देंगे.
शनि की ढैय्या इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
वर्ष 2021 में मिथुन एवं तुला राशि वाले लोगों पर साल भर के लिए शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा. इसके अलावा 2021 में सिंह राशि के लोगों को कुछ अच्छे तो कुछ बुरे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं.
इन राशियों पर रहने वाला है शनि का साढे़साती का प्रभाव
वर्ष 2021 में धनु, मकर एवं कुंभ राशि वाले लोगों पर साल भर के लिए शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा. आपको बता दें मकर में प्रवेश के समय धनु राशि के लिए उतरती, मकर के लिए मध्य और कुम्भ राशि के लिए चढ़ती साढ़े साती का प्रभाव रहेगा.
शनिदेव की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
इन उपायों से खुश करें शनि देव को:
शनि देव की पूजा के लिए कड़ी अराधना करनी होती है। खासकर शनि की साढ़ेसाती से परेशान लोगों को शनिदेव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए। इनकी पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान करना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं शनि देव की पूजा से जुड़ी बातें जिनका हमें पूजा करने से पहले जान लेना चाहिए।
1.शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर शनिदेव की मूर्ति के पास तेल चढ़ाएं या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें।
2.शनिदेव को तेल चढ़ाना चाहिए लेकिन इस बाद का ध्यान रखना चाहिए कि तेल इधर-उधर गिरे न। तेल को सावधानी से इस्तेमाल करें।
3.शनिवार को काला तिल और गुड़ चीटों को खिलाएं। इसके अलावा शनिवार के दिन चमड़े के जूते चप्पल दान करना भी अच्छा रहता है।4.शनिदेव की पूजा मूर्ति के सामने खड़ें न हों। शनि के उस मंदिर में जाएं, जहां शनि शिला के रूप में हों। इस दिन सात्विक आहार लें।
5.शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पीपल और शमी के पेड़ की पूजा करें। इसके अलावा शनि के सामनें तेल का दीपक जलाएं।
6.शनि की पूजा करने वालों का दूसरों के प्रति व्यवहार अच्छा होना चाहिए। इन लोगों को गरीबों, दीन दुखियों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
जानकारों के मुताबिक शास्त्रों में शनि देव के क्रोध के अनेक उदाहरण मिलते हैं। कहते हैं कि मेघनाद की कुंडली में रावण ने सारे ग्रहों को पकड़कर सबसे शुभ माने जाने वाले 11वें भाव में क़ैद कर दिया था, लेकिन त्रिलोक को जीतने वाला रावण भी शनि देव को रोक न सका और उन्होंने धीरे-से अपना पैर अनिष्ट-कारक 12वें भाव में बढ़ा दिया। शनि देव के इस कार्य की ही वजह से अपराजेय समझा जाने वाला मेघनाद भी आखिऱकार मृत्यु का ग्रास बना।
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक़ भिन्न-भिन्न भावों में शनि का फल भी भिन्न-भिन्न होता है। शनि सूर्य-पुत्र के नाम से ख्यात है। कहते हैं कि शनि जिसे चाहे राजा से रंक बना देता है और रंक से राजा। पंडित हेमचंद्र वशिष्ठ के अनुसार यदि आप शनि देव की वक्र दृष्टि का शिकार हैं तो यह 5 सरल उपाय जो बचाएंगे आपको शनि के क्रोध से और दिलाएंगे जीवन में क़ामयाबी…
1. हनुमान चालीसा का पाठ करें
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ शनिदेव के प्रकोप से बचने का रामबाण उपाय है। अगर आप ढैया या साढे साती से गुजऱ रहे हैं और शनि द्वारा दिए कष्टों से पीडि़त हैं, तो हनुमान चालीसा आपके लिए अचूक औषधि की तरह है। जनश्रुति है कि हनुमान जी ने शनि देव को लंका में दशग्रीव के बंधन से मुक्त कराया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कलियुग में अभिमानवश एक बार शनिदेव हनुमान जी के पास गए और बोले – “तुमने मुझे त्रेता में ज़रूर बचाया था, लेकिन अब यह कलिकाल है। मुझे अपना काम करना ही पड़ता है। इसलिए आज से तुम्हारे ऊपर मेरी साढ़े साती शुरू हो रही है। मैं तुम पर आ रहा हूँ।” यह कहते हुए वे हनुमान जी के मस्तक पर सवार हो गए।
शनिदेव के कारण हनुमान जी को सर पर खुजली होने लगी, जिसे मिटाने के लिए उन्होंने सर पर एक विशाल पर्वत रख लिया। जिसके नीचे शनिदेव दब गए और “त्राहि माम् त्राहि माम” चिल्लाने लगे। उन्होंने हनुमान जी से याचना की और कहा कि वे आगे से उन्हें या उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे। हनुमान चालीसा हनुमान जी के स्तोत्रों में बहुप्रचलित और अनन्त शक्तिसंपन्न है। इसका पाठ शनि के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला कहा गया है।

- शनि मंत्र का जाप
कहते हैं कि मन्त्रों में इतनी शक्ति होती है कि उनका सही उपयोग मरे हुए को भी जि़न्दा कर सकता है। हर देवता का अपना मन्त्र होता है, जिसको विधि-पूर्वक जपना उस देवता को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीक़ा है। शनि देव के निम्न मंत्र का 40 दिनों में 19,000 बार जप साढ़ेसाती में बहुत लाभ देता है –
चित्र में ये शामिल हो सकता है: एक या और लोेग
मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम:
शनि-मंत्र के बीज अक्षरों की अपरिमित शक्ति ढैया और साढ़े साती के ताप का शमन करती है। शनिदेव के इस मन्त्र का लाभ सभी को लेना चाहिए। साथ ही दशरथ कृत शनि स्तोत्र भी शनि के दुष्प्रभावों से बचने का बेहतरीन उपाय है।
- तिल, तेल और छायापात्र का दान
तिल, तेल और छायापात्र शनिदेव को अत्यन्त प्रिय माने जाते हैं। इन चीज़ों का दान शनि की शान्ति का प्रमुख उपाय है। मान्यता है कि यह दान शनि देव द्वारा दिए जाने वाले कष्टों से निजात दिलाता है। छायापात्र दान की विधि बहुत ही सरल है। मिट्टी के किसी बर्तन में सरसों का तैल लें, उसमें अपनी छाया देखकर उसे दान कर दें। यह दान शनि के आपके ऊपर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को दूर कर उनका आशीर्वाद लाता है। - धतूरे की जड़ धारण करें
वैदिक ज्योतिष में विभिन्न जड़ों की मदद से ग्रहों की शान्ति का विधान है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि रत्न धारण करना नुक़सान भी पहुँचा सकता है, लेकिन जड़ धारण करने से ऐसी आशंका नहीं रहती है। रत्न ग्रह की शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं जडिय़ाँ ग्रहों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोडऩे का कार्य करती हैं।
- सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें
जडिय़ों की ही तरह रुद्राक्ष को भी हानि रहित उपाय की मान्यता प्राप्त है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना न सिफऱ् भगवान शिव को प्रसन्न करता है, बल्कि इससे शनिदेव का आशीर्वाद भी दिलाता है। पुराणों के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और लक्ष्मी मैया की कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही सेहत से जुड़ी समस्याओं में भी इसे बहुत प्रभावी माना जाता है। इस रुद्राक्ष को सोमवार या शनिवार के दिन गंगा जल से धोकर धारण करने से शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिलता है और समृद्धि प्राप्त होती है।
ऐसे बचें शनि की साढ़े साती से:
लोग शनि की दिशा,साढ़े साती का नाम सुनते ही घबराने लगते हैं जिसके लिए वह मुंहमांगे कीमत देकर इसका उपाये करने में लगे रहते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों ये जानते हैं कि अगर कुछ बातों को ध्यान रखा जाए तो शनि की साढ़े सती उन्हें ज्यादा परेशान नहीं करेगी।
1- शराब तथा अन्य नशे से दूरे रहें।
2- किसी परस्त्री के साथ रिश्ता न रखें।
3- किसी का दिल न दुखाएं।
4- महिलाओं का आदर करें।
5- सुबह जल्दी उठकर भगवान का ध्यान करें।
6- परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिल जुलाकर रहेंं।
7- भैरवजी की उपासना करें और शाम के समय काले तिल के तेल का दीपक लगाकर शनि दोष से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
8- किसी धार्मिक कार्यक्रम में ईधन जैसे लकड़ी, कोयला आदि दान करने से शनि का बुरा प्रभाव टल जाता हैं।
9- समय समय पर शनि मंदिर में चिमटा, चमड़े की जूतियां आदि का दान करें।


























