बदायूं।अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाई जा रही है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बदायूं जनपद के ब्लॉक उझानी के ब्लॉक प्रमुख शिशुपाल सिंह शाक्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, (स्वदेश केसरी न्यूज़ इस वीडिओ की सत्यता की पुष्टि नहीं करता ) जिसमें वे दावा करते नजर आ रहे हैं कि “मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे—ये सभी हजारों साल पहले बुद्धविहार हुआ करते थे।”
वायरल वीडियो में ब्लॉक प्रमुख किसी धार्मिक कार्यक्रम में मंच से माइक पर संबोधन करते दिखाई दे रहे हैं। मंच के पीछे लगे बैनर पर भगवान बुद्ध का चित्र स्पष्ट नजर आता है, जिससे यह कार्यक्रम बौद्ध धर्म से जुड़ा प्रतीत होता है। अपने संबोधन में शिशुपाल सिंह शाक्य यह भी कहते हैं कि “चीन का एक दार्शनिक हजारों वर्ष पहले भारत आया था, जिसने भारत पर चीनी भाषा में एक पुस्तक लिखी। जब उसका हिंदी अनुवाद हुआ, तो पता चला कि बद्रीनाथ, केदारनाथ, अयोध्या जैसे तीर्थ स्थल पहले बुद्धविहार थे, जिन्हें तोड़कर मंदिर बना दिए गए।”
इतना ही नहीं, उन्होंने यह दावा भी किया कि “कई बुद्धविहारों को मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़कर मस्जिदों में बदल दिया” और भारत की शिक्षा व्यवस्था को बुद्धिज़्म के नुकसान का जिम्मेदार ठहराया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता बदायूं जनपद के गांव-गांव में राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ को उत्सव के रूप में मना रहे हैं। ऐसे माहौल में भाजपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा अयोध्या, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे आस्था के केंद्रों को लेकर किया गया यह दावा, एक नए विवाद को जन्म देता नजर आ रहा है।
सवाल जो उठ रहे हैं
- क्या भाजपा ब्लॉक प्रमुख का यह बयान व्यक्तिगत विचार है या इसके पीछे कोई राजनीतिक-वैचारिक एजेंडा?
- क्या भाजपा इसे “निजी बयान” बताकर पल्ला झाड़ लेगी, या वोट बैंक के नफा-नुकसान को देखकर मौन साधे रखेगी?
- क्या ऐतिहासिक तथ्यों और आस्था से जुड़े विषयों पर इस तरह के मंचीय दावे समाज में भ्रम और टकराव नहीं बढ़ाते?
वायरल वीडियो सामने आने के बाद आम जनता से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कोई इसे इतिहास से छेड़छाड़ बता रहा है तो कोई इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रहा है। फिलहाल भाजपा संगठन की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बदायूं से उठा यह मामला अब पूरे हिंदुस्तान में चर्चा का विषय बन चुका है।


























