- बदायूं में सपा MLC प्रत्याशी के, नाम वापसी से पूर्व सांसद धर्मेंद्र का कद भी गिरा,
- सपा जिलाध्यक्ष बोले जानकारी नहीं,
बदायूँ।। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में मतदान से पहले ही बदायूं स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी वागीश पाठक निर्विरोध निर्वाचित हो गए। इस सीट पर अभी तक दो प्रत्याशी थे। एक भाजपा के वागीश पाठक तो दूसरे समाजवादी पार्टी के सिनोद शाक्य। बैसे तो बुधवार सुबह से ही राजनीतिक गलियारों में सपा प्रत्याशी सिनोद शाक्य के पर्चा वापस लेने की चर्चा थी। दोपहर होते होते यह बात पुष्ट भी हो गई। सिनोद शाक्य ने दोपहर तीन बजे अचानक कलेक्ट्रेट पहुंच कर अपना पर्चा वापस ले लिया। लोगों को इसकी भनक उस वक्त लगी, जब डीएम आफिस के गेट पर इसका नोटिस चस्पा हुआ। ऐसे में अब यह सीट भाजपा के खाते में निर्विरोध जाना तय माना जा रहा है।


विधानसभा चुनाव में जिले की तीन सीटों पर कब्जा पाने के बाद सपाई खेमा काफी जोश में था। बात एमएलसी चुनाव की आई तो दातागंज से लगातार बसपा से दो बार विधायक रहे सिनोद कुमार शाक्य उर्फ दीपू को सपा से मैदान में उतारा गया। इस चुनावी महासमर का नेतृत्व सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव कर रहे थे। इधर, भाजपा से उद्योगपति वागीश पाठक भी मैदान में थे। कुल मिलाकर यहां कांटे की टक्कर मानी जा रही थी लेकिन बुधवार को अचानक सपा प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया जिसके चलते सारे समीकरण ही बदल गए हैं।
सिनोद के भाजपा में शामिल होने की अटकलें
सिनोद के भाजपा में शामिल होने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। बताते हैं कि मंगलवार रात को सिनोद शाक्य लखनऊ गए थे। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से उनकी बातचीत हुई। इसके बाद ही उन्होंने बुधवार को बदायूँ पहुंच कर पर्चा वापस ले लिया। हालांकि फिलहाल उनका मोबाइल रेंज के बाहर जा रहा है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि भाजपा ने उन्हें भविष्य में अन्य पदों पर होने वाले चुनाव में मौका देने का आश्वासन दिया हो।
जिलाध्यक्ष बोले जानकारी नहीं
प्रत्याशी ने नामांकन वापस ले लिया लेकिन सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव को इसकी भनक भी नहीं थी। जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। पता करके पूरी जानकारी दे पाएंगे।
क्या सिनोद को भाजपा से मिला कोई बड़ा ऑफर या धर्मेंद्र यादव की सलाह से लिया गया निर्णय ?
बताते चले कि इससे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सपा से सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य को प्रत्याशी गया था, बताया जाता है कि उस वक्त पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने उन्हें 20 से अधिक जिला पंचायत सदस्य देने के वादा किया था लेकिन नौ सदस्य ही दे सके थे। ऐसे में बाकी के सदस्यों को सिनोद ने अपने बलबूते जुटाया था। गत विधानसभा चुनावों में उन्होंने सपा से विधायकी का टिकट मांगा लेकिन उन्हें सांत्वना दे दी गई और कैप्टन अर्जुन को सपा से लड़ाया गया जिसके चलते वो आहत बताए जा रहे हैं। यहां इस बात का भी उल्लेख करना जरूरी है कि भाजपा के कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद को भाजपा से तोड़कर सपा में शामिल कराने में प्रमुख रोल सिनोद का ही रहा था इसी के चलते सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की आंख के तारे भी बन गए थे। लेकिन अचानक से ऐसा क्या हुआ जिसके चलते नाम अपना नाम वापिस ले लिया, प्रथम द्रष्टया इसके तीन कारण नजर आते दिख रहे हैं।
- क्या यह कदम धर्मेंद्र यादव के निर्देश पर उठाया गया कदम है लेकिन इस कदम की जानकारी सपा जिलाध्यक्ष के न होने से इसकी सम्भावना कम ही हैं
- चुनाव में गिने चुने वोटरों को देखते हुए सत्तापक्ष का प्रत्याशी मजबूत नजर आ रहा था इस लिये निश्चित हार देख, हार की डर से सोच समझकर लिया गया निर्णय है
- भाजपा के किसी चाणक्य द्वारा भाजपा में किसी अच्छी जगह समाहित कर पूरे पांच साल सत्ता का आनन्द लेने की सलाह पर लिया गया निर्णय हो।इन तीनों सवालों के जबाब आने वाले कुछ दिनों में हम सबके सामने आ ही जायेंगे। लेकिन राजनीति के जानकार अभी तो इसको सिनोद शाक्य की लगातार दो बार की उपेक्षा से आहत होकर सिनोद MLC प्रत्याशी तो बने लेकिन ऐन वक्त पर नाम वापस लेकर सपा को बड़ी बड़ी चोट पहुंचा दी।
भाजपा की जीत से अखिलेश यादव की नजर में धर्मेंद्र यादव बढ़े कद पर फिर सवालिया निशान लग गया है, कहने को तो अब बदायूँ से तीन विधायक सपा के हैं लेकिन mlc प्रत्याशी का पर्चा वापस लेने से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की अपनी जोड़तोड़ की राजनीति की रणनीति को बहुत बड़ा झटका लगा है, अगर यह घटना उनके बिना जानकारी के हुई है तो 2024 के चुनाव में बदायूँ से सपा प्रत्याशी होना उनके लिये मुश्किल भरा हो सकता है।

























