बदायूं/अलीगढ़/मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के विधानपरिषद चुनाव में बदायूं, अलीगढ़ और मिर्जापुर में विधानपरिषद चुनाव के लिए विपक्षियों के नाम वापस लेने या नामांकन निरस्त होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय हो गई है.














बदायूं जिलाधिकारी दीपा रंजन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सिनोद शाक्य ने आज अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद चुनाव मैदान में सिर्फ भाजपा प्रत्याशी वागीश पाठक ही बचे हैं.उन्होंने बताया कि वागीश को अब निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा और इस आशय की सूचना चुनाव आयोग को दे दी गई है. बदायूं में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सिनोद कुमार शाक्य के द्वारा अपना नामांकन वापस लेते ही भाजपा प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है बता दें कि बदायूं कभी सपा का गढ़ हुआ करता था , मोदी युग के बाद से सपा का किला भगवामय होता चला गया, गत विधानसभा चुनावों में तीन सीटें जीतकर सपा को थोड़ी ऑक्सीजन मिलती नजर आयी थी, तीन सीटों का जश्न सपा पूरी तरह से सेलिब्रेट भी नहीं कर पाई थी कि सिनोद शाक्य की इस चाल ने सपा की खुशियों को ग्रहण लगा दिया ।सपा को मिले इस तगडे झटके ने एक बार फिर बदायूँ राजनीति के समीकरण बिगाड़ कर रख दिए हैं,लोकसभा चुनावों से पूर्व अब फिर से बदायूँ की राजनीति पर भाजपा का वर्चस्व होता नजर आ रहा है। सिनोद के पाला बदलने से अब कई सपाइयों के भी पाला बदलने की सम्भावना व्यक्त आने लगी है, सपा की राजनीति में सिनोद के शामिल होने से बदायूँ में राजनीतिक स्तर पर बड़ा बदलाव की सम्भावना थी,लेकिन जिलापंचायत में मिली करारी हार, स्वामी प्रसाद मौर्या को भी भाजपा से तोड़कर सपा में शमिल कराने के चलते अखिलेश की नजरों सिनोद का कद धर्मेंद्र यादव से भी ऊँचा दिखने लगा था,जिसे धर्मेंद्र यादव का पचापाना मुश्किल था, सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष प्रेमपाल यादव,व धर्मेंद्र यादव ने रणनीति के तहत विधानसभा का टिकट सिनोद को नहीं मिलने दिया जिसके चलते सिनोद अंदर ही अंदर अपमानित महसूस करने लगे थे, बैसे भी सपा की मुस्लिम यादव की राजनीति में किसी दूसरी जाति का एडजस्ट होना बहुत ही मुश्किल भरा होता है, इसी राजनीति ने सपा को अब सत्ता से दूर भी कर दिया है,केवल मुस्लिम यादव के समीकरण के बदले सता के सपने देखना हर चुनाब में अखिलेश को भारी पड़ चुका है और इसी नीति के चलते सपा से किसी भी अन्य पार्टी से गठबंधन की उम्र केवल चुनाव तक सीमित होकर रह गयी है,
सपा उम्मीदवार के नाम वापिसी की कार्यवाही की खबर दोपहर में जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर चस्पा होते ही वागीश पाठक का निर्विरोध mlc निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया था,इस खबर को स्वदेश केसरी ने जैसे ही अपनी न्यूज़ में फ्लैश किया स्वदेश केसरी की यह खबर देखते ही देखते पूरे जिले में शोशल मीडिया के माध्यम वायरल हो गई, वागीश पाठक की जीत की खबर लगते ही भाजपा कार्यकर्ताओं व पाठक परिवार के सुभचिंतको व समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई ,समर्थकों का सिविल लाइन स्थित आवास पर देर रात खबर लिखे जाने तक तांता लगा हुआ था, जिले के कौने कौन से लोग माल्यर्पण व बुके देकर वधाई दे रहे हैं। इस दौरान लोग पहले पूर्व विधायक व बदायूँ की राजनीति में भीष्मपिता के नाम से मशहूर पूर्व विधायक प्रेम स्वरूप पाठक का सम्मान करते दिखे, बहीं वागीश पाठक अपने छोटे भाई शारदेन्दु पाठक के साथ वधाई देने आ रहे लोगों को मिठाई खिलाकर गर्म जोशी से स्वागत करते नजर आए। जहां एक ओर जीत का जश्न जारी है वहीं सूत्रों के हवाले से खबर है कि वागीश पाठक को प्रदेश सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने की प्रबल संभावना बन रही है, इसके भी प्रयास शुरू हो चुके हैं, जैसा कि सर्व विदित है कि वागीश पाठक इससे पूर्व बदायूँ से लोकसभा प्रत्याशी रह चुके हैं और केंद्रीय स्तर पर उनके बड़े बड़े नेताओं में उनकी अच्छी पैठ है, इसी के चलते उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र में बैठे उनके सुभचिंतक उन्हें सरकार में जिम्मेदारी दिलाने के लिये प्रयास शुरू कर चुके हैं, कल वागीश पाठक का दिल्ली जाने का कार्यक्रम है और सम्भावना है कि वहीं से वो मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिये लखनऊ रवाना होंगे।
वधाई देने वालों में बदायूँ क्लब के सचिव अक्षत अशेष, प्रदीप कुमार शर्मा, दीपमाला गोयल, अमन गोयल, डॉ सचिन माहेश्वरी, हरवंश पहलवान, रजनीश शर्मा,सुमित पाठक,राहुल पाठक,अशोक शर्मा,गौरव कुमार गोल्डी,सैनरा वैश्य,प्रतोष शर्मा,फकीरा, रोहित वाल्मीकि जोंटी,अमन रस्तोगी,आशीष शर्मा,मनोज गुप्ता,मनोज मोदी,विवेक राठी,पवन शर्मा,अभिषेक पाठक,शैलेश पाठक,सहित हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता,सुभचिंतक व समर्थक पहुंच कर वधाई प्रेषित कर रहे हैं,

























