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सरकार बनते ही समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड)लागू करने का किया ऐलान, सेकुलर दलों में हुई बेचैनी

देहरादून: उत्तराखंड के सीएम पुष्‍कर सिंह धामी ने राज्‍य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने का ऐलान किया है। गुरुवार को नई सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया। उत्‍तराखंड में चुनाव से ऐन पहले ही धामी ने घोषणा की थी कि सरकार बनते ही समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा।

बैठक के बाद पुष्‍कर सिंह धामी ने कहा, ‘आज नई सरकार का गठन होने के बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। 12 फरवरी 2022 को हमने जनता के समक्ष संकल्प लिया था कि हमारी सरकार का गठन होने पर हम यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर आएंगे। आज हमने तय किया है कि हम इसे जल्द ही लागू करेंगे।’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘हम एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएंगे और वो कमेटी इस कानून का एक ड्राफ्ट तैयार करेगी और हमारी सरकार उसे लागू करेगी। आज मंत्रिमंडल में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर दिया है। अन्य राज्यों से भी हम अपेक्षा करेंगे कि वहां पर भी इसे लागू किया जाए।

उत्‍तराखंड में 14 फरवरी को वोटिंग होनी थी, इसके दो दिन पहले धामी ने यह ऐलान किया था। इसमें उन्‍होंने दावा किया था कि उत्तराखंड में जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता लागू करने से राज्य में सभी वर्ग के लोगों के लिए समान अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा। यह सामाजिक सद्भाव को बढ़ाएगा। लैंगिक न्याय को बढ़ावा देगा। महिला सशक्तिकरण को मजबूत करेगा। राज्य की असाधारण सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पहचान और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करेगा।

सीएम धामी ने कहा था कि प्रदेश में नई भारतीय जनता पार्टी के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। कमेटी तमाम मसलों पर बात करेगी। समान नारिक संहिता के तहत सभी लोगों के लिए विवाह, तलाक, जमीन, संपत्ति और विरासत के संबंध में एक समान कानून व्यवस्था का लाभ मिलेगा। इसमें धर्म या आस्था से कोई मतलब नहीं होगा।

क्या है समान नागरिक सहिंता कानून ?

यूनिफॉर्म सिविल कोड को हिंदी भाषा में समान नागरिक संहिता कहा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि देश के हर शहरी के लिए एक जैसा कानून लागू हो. इसके तहत एक शहरी किसी भी धर्म-मज़हब से संबंध रखता हो, सभी के लिए एक ही कानून होगा. इसको धर्मनिर्पेक्ष कानून भी कहा जा सकता है.

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