बदायूं। शहर के सिटी मॉल में हाल ही में शुरू हुए सफायर नाइट क्लब एंड लाउंज को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच क्लब प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की है। क्लब का कहना है कि उद्घाटन से पूर्व आयोजित कार्यक्रम कोई व्यावसायिक क्लब पार्टी नहीं थी बल्कि साझेदारों द्वारा अपने परिजनों, रिश्तेदारों और करीबी मित्रों के लिए आयोजित एक निजी पारिवारिक पार्टी थी ।

जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में आमंत्रित परिवार अपने बच्चों के साथ शामिल हुए थे। मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था के साथ मनोरंजन हेतु प्रोफेशनल ऑर्केस्ट्रा कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह आमंत्रण आधारित था और इसके लिए किसी प्रकार का टिकट या शुल्क नहीं लिया गया था।

कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए। अधिकांश लोगों ने इसे शहर में एक नई और आधुनिक सुविधा की शुरुआत बताते हुए क्लब प्रबंधन को शुभकामनाएं दीं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ ऐसे लोग दिखाई दिए जो क्लब प्रबंधन के अनुसार न तो आमंत्रित अतिथि थे, न स्टाफ का हिस्सा और न ही आयोजन से जुड़े हुए थे। इसी वीडियो में कुछ बच्चे भी दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं आने लगीं और क्लब संस्कृति को लेकर बहस शुरू हो गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए क्लब के प्रबंध निदेशक दीपक नारंग ने तत्काल आंतरिक जांच समिति गठित की। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में चूक सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोग बैक डोर से परिसर में प्रवेश कर गए थे, जिसके बाद उनकी गतिविधियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

क्लब प्रबंधन ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। चार सुरक्षा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि तीन अन्य कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। प्रबंधन का कहना है कि जांच अभी जारी है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

स्वदेश केसरी ने इस विषय पर शहर के विभिन्न वर्गों के लोगों से बातचीत की। व्यापारी, चिकित्सक, इंजीनियर, निजी क्षेत्र के कर्मचारी और व्यस्क युवा वर्ग के कई लोगों का मानना था कि बदायूं के अधिकांश लोग मनोरंजन और बेहतर सुविधाओं के लिए बड़े शहरों का रुख करते हैं। यदि ऐसी सुविधाएं अब अपने शहर में उपलब्ध हो रही हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी नए व्यवसाय का मूल्यांकन एक वायरल वीडियो के आधार पर नहीं, बल्कि उसके समग्र संचालन और व्यवस्था के आधार पर होना चाहिए।

लोगों का यह भी कहना था कि यदि कहीं कोई कमी सामने आती है तो उसे सकारात्मक सुझावों और संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। बिना पूरी जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना न केवल भ्रम पैदा करता है, बल्कि उन लोगों के लिए भी निराशाजनक होता है जिन्होंने शहर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ी पूंजी और मेहनत लगाई है।

वहीं सोशल मीडिया पर चल रही विभिन्न चर्चाओं के बीच कई लोग यह भी कह रहे हैं कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने और सभी तथ्य सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए। फिलहाल क्लब प्रबंधन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति काफी हद तक स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।

शहर के अनेक नागरिकों का मानना है कि बदायूं में नए निवेश, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं का स्वागत होना चाहिए। साथ ही यह भी आवश्यक है कि ऐसे प्रतिष्ठान कानून, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करें, ताकि शहर का विकास और उसकी सकारात्मक पहचान दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें।

स्वदेश केसरी ने अपनी पड़ताल मे क्लब का पक्ष भी रख रहा है, वही सोशल मीडिया की गलतफहमी का उल्लेख भी किया है,

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