उझानी/दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बदायूं जिले के चर्चित उझानी कोतवाली गोलीकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लगभग 5 साल पुराने इस मामले में पुलिस ने पहली बार तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह, दरोगा रामऔतार सिंह और एक अन्य अज्ञात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
यह वही मामला है जिसमें दरोगा और सिपाही दोनों को गोली लगी थी, पर अब सामने आए आरोपों ने पूरी कहानी को उलट कर रख दिया है।

क्या था मामला — September 4, 2020 का गोलीकांड

घटना 4 सितंबर 2020 की सुबह 10 बजे उझानी कोतवाली परिसर में हुई थी, जहां—

आरोप है कि दरोगा रामऔतार सिंह ने कथित रूप से सिपाही ललित कुमार पर गोली चलाई,और बाद में खुद पर फायर झोंक लिया।दोनों गंभीर रूप से घायल हुए थे।उस समय यह मामला “आपसी विवाद” बताकर दबा दिया गया था, और सिपाही ललित पर भी मुकदमा दर्ज कर उसे बर्खास्त कर दिया गया था (बाद में बहाल हुआ)।

अब क्यों पलटी कहानी? — सिपाही की पत्नी के गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद अब सिपाही ललित कुमार की पत्नी की शिकायत पर FIR दर्ज हुई है।
शिकायत में उन्होंने चौंकाने वाले आरोप लगाए—

आरोप 1 — दरोगा रामऔतार करते थे अश्लील कमेंट और गंदे इशारे

महिला ने कहा कि वह कोतवाली में किसी काम से जाती थीं, तभी दरोगा रामऔतार उनके प्रति अश्लील टिप्पणियां करते थे।

आरोप 2 — पति ने विरोध किया तो धमकी

जब सिपाही ललित ने इसका विरोध किया तो दरोगा ने कहा—
“देख लूँगा तुझे…”

आरोप 3 — प्रभारी निरीक्षक के उकसाने पर गोली चली

शिकायत के अनुसार:

  • अगले दिन सिपाही ललित अनुमति लेने प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह के पास पहुंचे,
  • वहीँ कहासुनी हुई,
  • और ओमकार सिंह ने पहले से मौजूद दरोगा रामऔतार को उकसाया,
  • दरोगा और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति ने ललित की रायफल छीनी,
  • पहले ललित को गोली मारी, फिर खुद को भी गोली मार ली ताकि घटना को “आपसी भिड़ंत” दिखाया जा सके।

इस घटना में-सिपाही के कंधे के पास गोली लगी,और दरोगा रामऔतार के गुप्तांग के पास

तत्कालीन जांच पर भी बड़े सवाल

पीड़िता के अनुसार—

  • उस समय किसी भी अधिकारी ने उसकी शिकायत नहीं सुनी,
  • न ही कोतवाली में रिपोर्ट लिखी गई,
  • कई पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई,
  • और घटना को एकतरफा तरीके से “सिपाही दोषी” बताकर बंद करने की कोशिश हुई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस की नई FIR

लगातार अदालत में लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदायूं पुलिस ने आखिरकार—

दरोगा रामऔतार सिंह (वर्तमान तैनाती—पीलीभीत)
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ओमकार सिंह (वर्तमान तैनाती—रामपुर)
एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ उझानी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की है।

दो महीने पहले एडीजी की जांच भी सुर्खियों में आई थी

लगातार उठ रहे सवालों पर दो महीने पहले—एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी,एसएसपी ब्रजेश सिंह ने उझानी कोतवाली पहुंचकर घटना के पुराने अभिलेख,
तत्कालीन विवेचन, और तैनात पुलिसकर्मियों से पूछताछ की थी।तब माना गया था कि यह पूरा कदम सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दबाव में उठाया गया है।

अब आगे क्या?

इस नई FIR के बाद अब—जांच फिर से शुरू होगी,विभागीय कार्रवाई संभव है,और 5 साल से लंबित सत्य की परतें खुलने की संभावना है।परिवार ने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के कारण इस बार न्याय अवश्य मिलेगा।

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