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उझानी में गौरक्षक और ग्राम प्रधान क़े बातचीत के वायरल ऑडियो से मचा हड़कंप: ग्राम प्रधान बोले “मैं पैदायशी यदुवंशी और पक्का समाजवादी हूँ, गायों की सेवा करने को प्रधान नहीं बना ”

प्रधान ने गौरक्षक से कहा – “योगी सरकार नहीं देती पैसा, हमारी पंचायत अपने फंड से चलाती है गौशाला”

बदायूं / उझानी। क्षेत्र के ग्राम छतुईया के प्रधान राजन यादव और एक गौरक्षक प्रखर अग्रवाल के बीच हुई फोन पर बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में गौरक्षक ने ग्राम प्रधान से एक्सीडेंट मे घायल गाय जो कीचड मे पड़ी हुई थी उसको कीचड़ से निकलवाकर गौशाला मे संरक्षित कराने की अपील करता है लेकिन ग्राम प्रधान ने 6 घंटे तक न गाय का उपचार कराया और न ही कीचड़ से उठा कर उसको गौ शाला मे संरक्षित कराया ज़ब इस बात को लेकर गौरक्षक ने अपनी नाराज़गी व्यक्त की तो ग्राम प्रधान अपने आप को “पक्का यदुवंशी और समाजवादी पार्टी का प्रधान” बताते सुनाई दे रहे हैं, बल्कि योगी सरकार की गौशाला नीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, घटना तब हुई जब उझानी क्षेत्र में एक गाय का एक्सीडेंट हो गया और वह सड़क किनारे कीचड़ में फंसी हुई थी। इसकी जानकारी मिलने पर स्थानीय गौरक्षक प्रखर अग्रवाल ने ग्राम प्रधान को फोन करके कहा कि घायल गाय को गौशाला में शिफ्ट करवाकर उपचार की व्यवस्था कराई जाए। इस पर ग्राम प्रधान रज्जन यादव का जवाब विवाद का कारण बन गया।

वायरल ऑडियो में ग्राम प्रधान कहते सुनाई दे रहे हैं —

“मैं पक्का समाजवादी हूँ, बीजेपी की सरकार से हमें गायों के नाम पर कोई पैसा नहीं मिलता। हमारी ग्राम पंचायत हर महीने 70–80 हज़ार रुपये अपने फंड से खर्च करती है। तुम लोग गौरक्षक हो तो बताओ, तुम्हारे संगठन ने कितनी JCB दिलाई हैं जो गायों की सेवा में लगी हों?”

प्रधान आगे कहते हैं —

“जनता ने मुझे वोट देकर प्रधान बनाया है, गायों की सेवा करने को प्रधान नहीं बनाया। मेरे घर में खुद गायें पलती हैं, मैं उन्हीं की सेवा करता हूँ।”

प्रधान की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर पंचायतें खुद खर्च कर रही हैं तो योगी सरकार द्वारा जारी किए जा रहे गौशाला फंड का उपयोग कहाँ हो रहा है? वहीं, दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि यदि प्रधान का दावा सही है, तो राज्य सरकार के गौ संरक्षण दावों पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।

गौरक्षक प्रखर अग्रवाल ने कहा —

“मैंने सिर्फ एक घायल गाय को बचाने की अपील की थी, लेकिन ग्राम प्रधान ने राजनीतिक पहचान बताकर बात को राजनीतिक रंग देकर टाल दिया। यह बहुत दुखद है कि अब गायों की सेवा भी राजनीति में फंस रही है।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि छतुईया ग्राम पंचायत क्षेत्र में गौशाला की स्थिति दयनीय है। कई गायें कुपोषण और इलाज के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं।गांव में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में राज्य सरकार गौशालाओं को फंड जारी नहीं कर रही, या फिर यह राशि कहीं बीच में ही अटक रही है?

ग्रामीणों और गौसेवकों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच और ग्राम प्रधान पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, उझानी प्रशासन को भी इस वायरल ऑडियो की प्राथमिक जांच शुरू कर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए,ऑडियो मे जनप्रतिनिधि का व्यान विवादित पाया जाये तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

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