बिल्सी (बदायूं) ग्राम पंचायत इंछा के अंतर्गत आने वाले गांव सतेती (पट्टी–सुकाल) में एक बार फिर श्मशान भूमि निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय बदायूं पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर मांग की कि श्मशान का निर्माण वर्तमान विवादित गाटा संख्या 46 के बजाय, पारंपरिक और सामाजिक रूप से स्वीकृत गाटा संख्या 55 पर ही कराया जाए। ग्रामीणों ने मंदिर के समीप श्मशान निर्माण को धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध बताते हुए गहरी आपत्ति जताई है।
मंदिर के पास श्मशान! धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द पर संकट,
ज्ञापन में ग्रामीणों ने साफ कहा कि गाटा 46 बाबा भगवानदास जी की प्राचीन समाधि और मंदिर के बिल्कुल समीप है। यदि वहां श्मशान बनता है तो धार्मिक भावनाएं आहत होंगी और गांव का सामाजिक सौहार्द भी खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को चेत जाना चाहिए कि कहीं उसकी यह लापरवाही भविष्य में भारी न पड़ जाए। मंदिर के बगल में चिता जलने की कल्पना भी असहनीय है।
क्या मंदिर और चिता साथ-साथ चलेंगे? सवालों के घेरे में प्रशासन की सोच
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन केवल अभिलेखीय प्रविष्टियों के आधार पर निर्णय ले रहा है जबकि व्यवहारिक और परंपरागत दृष्टिकोण की पूर्णतः अनदेखी की जा रही है। गाटा 55 पर पीढ़ियों से अंतिम संस्कार होते आ रहे हैं, फिर उसे छोड़कर नया स्थल क्यों? यह प्रश्न प्रशासन को आत्ममंथन के लिए विवश करता है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों के बीच नाराजगी का कारण बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह मुद्दा धार्मिक टकराव की स्थिति भी पैदा कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला भी दिया गया
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 25 में वर्णित धार्मिक स्वतंत्रता और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (मसूदपुर श्मशान घाट मामला) का हवाला देते हुए प्रशासन से कहा कि पारंपरिक स्थलों को किसी हाल में न बदला जाए। उन्होंने गाटा 55 को ही राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान के रूप में दर्ज किए जाने की भी मांग की है।
गाटा–55 पर दबंगों का अवैध कब्जा, अधिकारी मौन क्यों?
ज्ञापन के अलावा ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गाटा संख्या 55 पर कुछ प्रभावशाली लोगों का अवैध कब्जा है और इसी कारण अधिकारियों द्वारा वहां निर्माण से परहेज़ किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की कि इन कब्जेदारों को हटाकर, गाटा 55 को ही वैधानिक रूप से श्मशान घोषित किया जाए।
क्या प्रशासन समय रहते चेत पाएगा?
यह मुद्दा पहले भी प्रशासनिक और मीडिया मंचों पर उठ चुका है, लेकिन अब इसकी गंभीरता और संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही प्रशासन के लिए भारी पड़ सकती है। मंदिर और श्मशान को आमने-सामने खड़ा करने की भूल, सामाजिक शांति को नुकसान पहुँचा सकती है।
डीएम ने दिया मौखिक आश्वासन, लेकिन ग्रामीणों को है ठोस कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल जिलाधिकारी ने मंदिर के समीप श्मशान न बनाने का मौखिक आश्वासन दिया है, परंतु ग्रामीण तब तक संतुष्ट नहीं होंगे जब तक इसे आधिकारिक आदेश के रूप में नहीं बदला जाता।
ज्ञापन देने वालों में शामिल प्रमुख नाम
अनिल सिंह, अभिषेक सिंह, दिनेश जाटव, शानू जाटव, संदीप सिंह, राहुल सिंह, गौरव सिंह, सचिन, करन सिंह, भोपाली सिंह, जयवीर सिंह, सुबोध सिंह, भुवनेश सिंह, जीतू सिंह, विनोद सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने आवाज उठाई।


























