





बदायूं में आज राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर एक ऐतिहासिक पहल का साक्षी बना, जहां प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों को नि:शुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
प्रधानमंत्री दिव्यांशा केन्द्र,दिव्यांगजनों को सात प्रकार की दिव्यांगता के लिए प्रमाण पत्र मिलते थे लेकिन केंद्र सरकार के प्रयास से अब इसको बढ़कर 21 कर दिया गया है और अब दिव्यांगजनों को 21 प्रकार की दिव्यांगता के लिए प्रमाण पत्र मिलते हैं। सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए आरक्षण को 03 प्रतिशत से बढ़ाकर 05 प्रतिशत किया है।सरकार ने विकलांगजनों को दिव्यांगजन नाम दिया और उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजनों ने देश का मान बढ़ाया है। पैरा ओलंपिक में ओलंपिक से ज्यादा मैडल जीतकर दिव्यांगजनों ने देश को गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री दिव्यांशा केन्द्र सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को एक ही स्थान पर सहायक उपकरणों की जांच, मूल्यांकन, परामर्श, वितरण एवं अनुवर्ती सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराना है।
इन केन्द्रों की स्थापना मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधीन कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) के माध्यम से की जा रही है।यह केन्द्र विशेष रूप से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय सरकार की एडिप योजना तथा राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, वैसाखी, श्रवण यंत्र, दृष्टि बाधित हेतु सुगम्य केन, छड़ी, वॉकर, कमोड चेयर, नी-ब्रेस, स्ै बेल्ट, केलिपर्स, श्रवण मूल्यांकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। यह केन्द्र दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सशक्त, आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है।
वर्तमान में देशभर में 74 प्रधानमंत्री दिव्यांशा केन्द्र संचालित हैं और इस 75वें केन्द्र की स्थापना के साथ यह संख्या एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर चुकी है। अब तक 1.40 लाख से अधिक लाभार्थियों को 179.15 लाख रुपये मूल्य के सहायक उपकरणों का वितरण किया जा चुका है।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत ALIMCO द्वारा संचालित इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय राज्यमंत्री श्री बी.एल. वर्मा, द्वारा एडिप और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए गए। इन पूर्व चिन्हित लाभार्थियों को एलिम्को द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग आयोजित परीक्षण शिविरों मे चिन्हित किया गया, जिसमे कुल 277 लाभार्थी है जिसमे 70 दिव्यांगजन तथा 207 बुजुर्ग नागरिकों को 1327 सहायक उपकरण वितरित किये जाएंगे जिनकी लागत 31.89 लाख रुपये है।
इस अवसर पर बदायूं सदर विधायक श्री महेश चंद्र गुप्ता, बिल्सी विधायक श्री हरीश शाक्य, जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती वर्षा यादव, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री राजीव गुप्ता, भाजपा के बरिष्ठ नेता एवं MLC वागिश पाठक के भाई शारदेन्दु पाठक,पूर्व विधायक श्री विमल कृष्ण अग्रवाल, भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्री अशोक भारती सहित कई ब्लॉक प्रमुखों और गणमान्य जनप्रतिनिधियों उपस्थिति रहे।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा,
“यह केंद्र प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र को साकार करता है। दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है।”
सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह केंद्र न केवल बदायूं के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे मंडल क्षेत्र के दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। वहीं, बिल्सी विधायक हरीश शाक्य ने केंद्र के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांगजनों को राहत मिलने की उम्मीद जताई।
कार्यक्रम में बताया गया कि केंद्र पर व्हीलचेयर, बैसाखी, कान की मशीन, छड़ी, ट्राइसाइकिल सहित विभिन्न सहायक उपकरणों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। यह सभी उपकरण दिव्यांगों की दैनिक जीवन में सुविधा, आत्मनिर्भरता और सम्मान सुनिश्चित करेंगे।
जिला पंचायत अध्यक्षा वर्षा यादव ने कहा कि यह पहल सामाजिक समानता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों लाभार्थी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस योजना के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के स्थायी रूप से संचालन और जन-जन तक जानकारी पहुंचाने के लिए विशेष रणनीति पर भी चर्चा की गई।
बदायूं जिले में शुरू हुआ यह केंद्र प्रधानमंत्री की समावेशी सोच का प्रमाण है, जो ‘दिव्यांग नहीं, सक्षम नागरिक’ की भावना को सशक्त रूप दे रहा है।


























