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बिल्सी :बदायूं का पहला मामला, जहां नए कानून के तहत बिल्सी में मासूम का रेप कर हत्या मामले में दोषी को मिली फांसी, यूट्यूबर पर भी मुकदमा दर्ज

बिल्सी। पांच माह पूर्व सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद सिर कुचलकर हत्या करने और शव छिपाने के दोषी जाने आलम उर्फ ज़ेना को अपर सत्र एवं स्पेशल न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) दीपक यादव ने फांसी की सजा सुनाई है। दोषी पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले को 12 गवाहों और 23 सबूतों ने अंजाम तक पहुंचाया।

तीन माह में पूरा हुआ ट्रायल, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने दी मजबूती

मामले की सुनवाई कोर्ट में लगभग तीन माह तक चली, जिसमें विशेष लोक अभियोजक अमूल जौहरी, प्रदीप भारती और वीरेंद्र सिंह वर्मा ने दोषी के खिलाफ प्रभावी पैरवी की। सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने केस को और मजबूत किया, जिससे पीड़ित परिवार को पांच महीने में न्याय मिल सका

इन गवाहों की गवाही ने दोषी को दिलाई फांसी

मामले में पीड़िता के पिता (वादी), पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर पारुल सिंह, एफआईआर एवं जीडी पेश करने वाले हेड कांस्टेबल संदीप कुमार, स्कूल का एसआर रजिस्टर प्रस्तुत करने वाले प्रधानाध्यापक हरीश यादव, सीसीटीवी फुटेज देने वाले निश्चल मालपानी और सुबोध वार्ष्णेय, विवेचना अधिकारी प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह पुंडीर, परवेज, तौफीक व विकास आर्य समेत अन्य गवाहों की गवाही ने अहम भूमिका निभाई।

यूट्यूबर पर केस दर्ज, कोर्ट में झूठी गवाही देने वाले पर भी कार्रवाई

कोर्ट ने बिल्सी निवासी एक यूट्यूबर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं, जिसने अपने यूट्यूब चैनल पर बच्ची के पिता सहित दो लोगों का इंटरव्यू प्रसारित किया था, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर हुई।

इसके अलावा, एक प्रतिष्ठित व्यापारी को फंसाने की कोशिश भी हुई, लेकिन पुलिस ने चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं किया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक युवक को गवाह बनाया गया, जो बच्ची का मामा निकला। उसने न्यायालय में व्यापारी को दोषी के साथ देखने की बात कही थी, लेकिन जांच में उसके बयान झूठे पाए गए। इस पर न्यायालय ने उसके खिलाफ भी वाद दर्ज किया है।

एसएसपी बोले – बदायूं का पहला मामला, जहां नए कानून के तहत मिली फांसी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि नए दंड संहिता कानून लागू होने के बाद यह बदायूं जिले का पहला मामला है, जिसमें दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई हैऑपरेशन कन्विक्शन और पॉक्सो एक्ट को ध्यान में रखते हुए तेजी से विवेचना कर सशक्त पैरवी की गई। उन्होंने कहा कि इस केस से जुड़े विवेचक और अन्य पुलिस अधिकारियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा

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