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बिल्सी में तीन मंजिल पर बना उपनिबंधक कार्यालय किसी दिन बीमार बृधजनों के लिए होगा जानलेवा साबित,प्रशासन कर रहा किसी अनहोनी का इंतजार?

बिल्सी तहसील परिसर में तीसरी मंजिल पर बना उपनिबंधक कार्यालय वृद्ध, बीमार और दिव्यांग जनों व महिलाओं को बड़ा ही कष्टकारी साबित हो रहा है, जहां स्वस्थ्य लोगों की तीन मंजिल तक़ सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते, सांस फूल जाती है ऐसे मे वृद्ध, बीमार और दिव्यांग जनों व महिलाओं की क्या हालत होती होगी, क्षेत्र वासियों को 2 दशक से इस गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं को भी यहां आने-जाने में काफी कठिनाई होती है। यह स्थिति प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते और भी गंभीर हो चुकी है।

दो दशक पुरानी समस्या

साल 2002 में, तहसील भवन के तीसरी मंजिल पर उपनिबंधक कार्यालय और आपूर्ति कार्यालय को शिफ्ट किया गया था। तब से लेकर आज तक, लोग इस समस्या को झेल रहे हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए लोगों को तीन मंजिल सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो बीमार और वृद्ध व्यक्तियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सांस फूलने, थकावट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते कई बार लोग दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बचे हैं।

शासन-प्रशासन का अनदेखा रवैया

कार्यवाहक उपनिबंधक पंचम सिंह ने बताया कि कार्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए संबंधित विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन 22 वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है। तहसील दिवस पर भी इस समस्या को जिलाधिकारी के समक्ष रखा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

क्षेत्रवासियों की पीड़ा और चेतावनी

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की यह लापरवाही किसी दिन गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। खासतौर पर हार्ट पेशेंट्स और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उपनिबंधक कार्यालय को नई जगह पर नहीं शिफ्ट किया गया, तो वह बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

यह सवाल क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर जहां सरकार और प्रशासन बेहतर सुविधाएं देने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर, बिल्सी तहसील के लोग दो दशक से इस समस्या से जूझ रहे हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर कब तक समाधान निकाला जाता है। क्या क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस समस्या का समाधान कराना नहीं चाहते या इस कार्य को कराने से उनको कोई लाभ नहीं होने वाला इसलिए ओर उनका ध्यान नहीं है।

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