बिल्सी/गुधनी| यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित आर्य समाज मंदिर में आज साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सामवेद के पवित्र मंत्रों से आहुतियां दी गईं। यज्ञ के उपरांत, आर्य समाज के अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने प्रवचन में कहा कि स्वर्ग और नरक इसी जीवन में, मनुष्य के कर्मों के आधार पर मिलते हैं। उन्होंने समझाया कि सुख विशेष का नाम स्वर्ग है, जबकि दुख विशेष का नाम नर्क है।
आचार्य संजीव रूप ने बताया कि जिस घर में कलह हो, अंधेरा और सीलन हो, भोजन और धन का अभाव हो, और कर्ज व बीमारियां हों, वह घर नरक के समान है। इसके विपरीत, जहां सुंदर रहने का स्थान हो, सभी प्रेमपूर्वक रहते हों, अन्न-धन पर्याप्त हो, और सभी स्वस्थ हों, वह घर स्वर्ग के समान है।
कुमारी तृप्ति शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को उसके कर्मों का फल अवश्य भोगना होता है। कर्म करने में मनुष्य स्वतंत्र है, लेकिन फल पाने में परतंत्र। बुराई के मार्ग पर चलने वाला कभी सुखी नहीं होता, जैसे मिर्ची का बीज बोने पर कभी टमाटर नहीं उगता।
इस अवसर पर मास्टर साहब सिंह, कुमारी यीशु आर्य, कुमारी मोना रानी, कुमारी भावना आर्य, कुमारी कौशिकी आर्य, श्रीमती सरोजा देवी, और भानु प्रकाश सिंह आदि उपस्थित रहे।

























