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सुप्रीम कोर्ट में धरी रह गई राम देव की राजनीतिक पॉवर और पैसा,बाबा रामदेव को बड़ा झटका, पतंजलि के 14 उत्पादों पर उत्तराखंड सरकार ने लगाया बैन, यहां देखें पूरी लिस्ट,

  • बाबा रामदेव की कुछ दवाइयों पर उत्तराखंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने लगाया प्रतिबंध
  • सूची में श्वासारि वटी और मुक्ता वटी,आईड्रॉप,समेत 14 दवाइयां शामिल
  • यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी गई है

दिल्ली/हरिद्वार। सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर होता दिख रहा है। उत्तराखंड सरकार ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी कंपनी के 14 उत्पादों पर बैन लगा दिया है।इनमें खांसी की दवा से लेकर कई तरह की गोलियां भी शामिल हैं। उत्तराखंड सरकार के लाइसेंस प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी की ओर से उत्पादों के बारे में भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए कंपनी के लाइसेंस को सस्पेंड किया गया है।

भारत मे सुप्रीम कोर्ट न हो तो उद्योगपति धनबल से शासन प्रशासन को जेब मे लिये घूमते हैं,ऐसे ही कुछ मामले वर्तमान में लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, इसमें ताजातरीन मामला उत्तराखंड से सामने आ रहा है जहां की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के हंटर के बाद अपना चाल चरित्र चेहरा बदलने का प्रयास किया है जिसके अंतर्गत पूरी दुनिया मे योग गुरू के नाम से मशहूर बाबा रामदेव की कम्पनियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही को मजबूर होना पड़ा है, उद्योगपति बाबा रामदेव की हनक के आगे उत्तराखंड का शासन प्रशासन पिछले एक दशक से उनकी उंगलियों पर नाचने को मजबूर था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस उंगली को मरोड़ कर रख दिया है, विदित हो जबसे सुप्रीम कोर्ट ने कि भारत सरकार द्वारा कानून में बदलाव कर इलेक्ट्रॉल बांड के जरिये कालेधन को सफेद करके जो चंदे का खेल चल रहा था उसको असंवैधानिक करार दिया है उसके बाद sbi ने जो लिस्ट जारी की उसमें साफ साफ दिख रहा है कि नम्बर 2 के काम को नम्बर 1 कराने के लिये चंदे की आड़ में बड़ा घपला चल रहा था। इस घोटाले से पता चलता है कि किस तरह घाटे वाली कम्पनी, दवाओं के मानक पूरे न करने वाली कम्पनियों से चंदा लेकर उन्हें जनता की ज़िंदगी से खेलने के लिये आँखे बंद कर ली गई थी। बाबा रामदेव की कम्पनियां तो लगातार सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक की अवमानना करने की हिम्मत दिखा रहीं थीं,लेकिन देर से ही सही लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपतियों के इस खेल पर करारी चोट की है

सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर

भ्रामक विज्ञापन को लेकर धामी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सोमवार शाम हलफनामा भी दायर कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में अपने कुछ उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए पतंजलि को फटकार लगाई थी।

पतंजलि के मामले में आज भी सुनवाई

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को पतंजलि के मामले की सुनवाई करेगा, ताकि यह तय किया जा सके कि रामदेव के खिलाफ अवमानना का आरोप लगाया जाए या नहीं। वहीं उत्पादों पर रोक लगाने के मामले में पतंजलि ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।

इन उत्पादों पर लगाई रोक

उत्तराखंड औषधि नियंत्रण विभाग के लाइसेंस प्राधिकरण ने बाबा रामदेव की पतंजलि की दिव्य फार्मेसी कंपनी के 14 प्रोडक्ट्स पर रोक लगा दी है। दिव्य फार्मेसी के जिन प्रोडक्ट्स पर प्रतिबंध लगा है उनमें श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, दिव्य ब्रोंकोम, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, बीपी ग्रिट,मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने की थी खिंचाई

बीते 23 अप्रैल को पिछली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने समाचार पत्रों में अपनी माफी को “प्रमुखता से” प्रदर्शित नहीं करने के लिए पतंजलि की खिंचाई की थी। अदालत ने पूछा था कि क्या पतंजलि द्वारा अखबारों में दी गई माफी का आकार उसके उत्पादों के लिए पूरे पेज के विज्ञापन के समान था। पतंजलि ने कहा था कि उसने 67 अखबारों में माफीनामा प्रकाशित किया है और कहा है कि वह अदालत का पूरा सम्मान करता है और अपनी गलतियों को नहीं दोहराया जाएगा।

बड़ा माफीनामा छपवाया गया था

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पतंजलि ने अखबारों में एक और माफीनामा प्रकाशित कराया, जो पिछले माफीनामे से भी बड़ा था। इससे पहले, रामदेव और बालकृष्ण ने महामारी के दौरान कोरोनिल जैसे अपने उत्पादों की दक्षता के बारे में उच्च दावे करते हुए फर्म द्वारा जारी विज्ञापनों पर शीर्ष अदालत के समक्ष “बिना शर्त और अयोग्य माफी” मांगी थी।

आईएमए ने दायर की थी याचिका

शीर्ष अदालत ने नवंबर 2023 में इंडियन मेडिकल द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान पतंजलि को अपने उत्पादों के विज्ञापनों को रोकने का निर्देश दिया था, जिसमें उन्होंने ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 में निर्दिष्ट बीमारियों और विकारों का इलाज करने का दावा किया था। एसोसिएशन (IMA) ने आधुनिक चिकित्सा की आलोचना करने पर रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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