बिल्सी (बदायूँ) सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के मंहत मटरुमल शर्मा महाराज के तत्वावधान में ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस की कथा में कथा व्यास पुष्कर पीठाधीश्वर जगद्गुरू श्री रामानुजाचार्य, स्वामी रामचन्द्राचार्य ने कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान ने दावानल से अपने मित्रों की रक्षा की पूज्य श्री स्वामी जी महाराज ने दावानल प्रसंग के माध्यम से भगवान की शरणागति का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया भगवान के मित्र बालक प्रतिदिन भगवान का वन के सुंदर-सुंदर पुष्पों से श्रृंगार करते हैं भगवान के अनन्य भक्त भगवान को जिस रूप में देखना चाहते हैं भगवान उसी रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते है संसार से की गई आशा सदैव दुख का कारण ही बनती है परंतु भगवान से जुड़ी हुई आशा कल्याणकारी होती है जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं वह सब भगवान के श्री चरणों में समर्पित कर देना चाहिए जब हम भगवान के श्री चरणों में अपने समस्त कर्मों को समर्पित कर देते हैं तो फिर हमारी चिंता स्वयं भगवान करते हैं ।










दशम स्कंध में भगवान की बड़ी मनोहारी लीलाएं हैं प्रलम्बासुर का उद्धार भगवान ने बलराम जी के द्वारा करवाया छोटे छोटे बालक भगवान को खेल में पराजित कर देते हैं भगवान उन से पराजित होकर घोड़ा बन जाते हैं भक्त कभी भी निराशावादी नहीं होता है परंतु संसार के प्रति कभी आशावादी भी नहीं होता है बृज की गोपियां प्रतिक्षण भगवान के चिंतन में निमग्न रहती हैं विद्वान वही है जो अपना समय शस्त्रों के अभ्यास में अच्छे अच्छे कार्यों में अपने समय का सदुपयोग करें मूर्ख व्यक्ति समय का सदुपयोग नहीं कर पाता मूर्ख व्यक्ति व्यर्थ में ही अपने जीवन के अमूल्य समय को नष्ट कर देता है भगवान ने वर्षा ऋतु के माध्यम से बलराम जी को बड़ा ही सुंदर संसार का और सांसारिक धर्मों का उपदेश किया भगवान श्रीराम ने भी वर्षा ऋतु के माध्यम से लक्ष्मण जी को रामावतार में बड़ा ही सुंदर उपदेश दिया था भगवान श्री कृष्ण जब गायों को चराने के लिए बन में चले जाते हैं अब गोपियों का एक एक क्षण सौ सौ युगों के समान व्यतीत होता है
श्रीमद्भागवत की आरती सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के महन्त मटरुमल शर्मा महाराज, धर्मपत्नी शांति देवी ने की आरती के बाद कथा को विराम दिया
कथा सुनने पहुंचे बदायूँ भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता
कथा में बहेडी ,खटीमा ( उतराखंड ),बदायूँ, बनारस ,बजीरगज, मेरठ, गाजियाबाद, कासंगज,चन्दौसी, हापुड़, से श्रद्धालु कथा का रसपान करने आये बदायूँ से प्रदीप शर्मा, ओजित शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, यश भारद्वाज ,मुकेश गुप्ता,प्रवीण वार्ष्णेय, विशाल खासट, राजा बाबू वार्ष्णेय,अनूप माहेश्वरी,दीपू माहेश्वरी , रोहित माहेश्वरी, लालू माहेश्वरी ,देवकीनंदन शास्त्री,टिंकू वाष्र्णेय, आकाश वाष्र्णेय,चारू सोमानी,नरेंद्र गरल,आशीष बशिष्ठ,भारत चन्दौसी ,गिरीश गिरि ,मुनीशगिरि ,अजय गिरि,सुभाष बाहेती,जय प्रकाश माहेश्वरी ,कपिल माहेश्वरी ,रवि वाष्र्णेय, सतीश माहेश्वरी ,आशीष माहेश्वरी ,सोमेन्द्र तोष्णीवाल, हरिओम शर्मा, नीरज तोष्णीवाल ,राजेश माहेश्वरी,राजीव शर्मा ,दीपक माहेश्वरी (बाबा ),यश शर्मा ,पुष्कीन माहेश्वरी,आचार्य ध्रुव मिश्रा ,देव वार्ष्णेय, कुशाग्र माहेश्वरी,आरोही सोमानी, देवांश सोमानी, शिवकुमार,सनुज माहेश्वरी रंजनमाहेश्वरी जितेंद्र वाष्र्णेय ,राजेश माहेश्वरी , स्वतंत्र राठी ,प्रिंस राठी,संदीप मिश्रा,शांति देवी,मंजुला शर्मा,रीनू शर्मा, मनीषा शर्मा, रेखा शर्मा ,कल्पना भारद्वाज ,ममता राठी,सारिका राठी, धरती माहेश्वरी, सरिता माहेश्वरी ,लता माहेश्वरी ,मोहित देवल,देव वार्ष्णेय, जी) सुवीन माहेश्वरी, हरिश्व्वर राठी,चंद्रपाल माहेश्वरी,भुवनेश्वर राठी ,सुभाष चन्द्र माहेश्वरी आदि हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

























