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बिल्सी में कथा व्यास रामचन्द्राचार्य के श्री मुख से कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुन भाव विभोर हो रहे श्रोता,छठे दिवस बकासुर उद्धार की सुनाई कथा,

बिल्सी (बदायूँ) महंत मटरुमल शर्मा महाराज सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम बिल्सी के तत्वावधान में ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिवस की कथा व्यास पुष्कर पीठाधीश्वर जगद्गुरू श्री रामानुजाचार्य, स्वामी रामचन्द्राचार्य ने कथा सुनाते हुए श्रीमद् भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान की लीलाओं का वर्णन करते हुए बकासुर उद्धार की कथा सुनाई ।

बकासुर के बारे में बताते हुए स्वामी रामचन्द्राचार्य ने कहा कि बकासुर दम्भ का प्रतीक है व्यक्ति के अंदर कुछ है और बाहर कुछ दिखाने का जो प्रयत्न करता है वही दंभी है जिस व्यक्ति के जीवन में दंभ की मात्रा ज्यादा होती है वह समाज के लिए ठीक नहीं होता भगवान ने बत्सासुर का उद्धार किया वत्सासुर अधर्म का स्वरूप है परंतु वह बछड़े का रूप बनाकर आया था बछड़ा धर्म का प्रतीक होता है अधर्म जब धर्म का रूप बनाकर आता है तो वह समाज के लिए ज्यादा घातक होता है भगवान श्री कृष्ण ने श्री कृष्ण अवतार में सब का शोधन किया है इसके उपरांत भगवान ने अघासुर का उद्धार किया अघासुर उद्धार के प्रसंग में स्वयं ब्रह्मा जी भगवान की लीलाओं को देखकर मोहित हो गए ब्रह्मा जी भगवान की परीक्षा लेते हैं भगवान उनके ऊपर भी कृपा करते हैं ब्रह्मा जी ने भगवान की बहुत सुंदर स्तुति की दशम स्कंध की जो कथा है उसको महापुराण की दृष्टि से निरोध कहते हैं हमारे मन की बृत्तियाँ भगवान के चरणों से जुड़ जाएं वही निरोध कहलाता है।
श्रीमद्भागवत की आरती सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के महन्त मटरुमल शर्मा महाराज, धर्मपत्नी शांति देवी ने की आरती के बाद कथा को विराम दिया गया।

कथा में बहेडी ,उझानी ,बदायूँ, बजीरगज, बिसौली, गाजियाबाद, कासंगज,चन्दौसी, हापुड़, से श्रद्धालु कथा का रसपान करने आये बदायूँ से प्रदीप शर्मा, ओजित शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, यश भारद्वाज ,राजीव शर्मा ,श्रीकांत मिश्रा बहेडी ,दीपक बाबा ,पुष्कीन माहेश्वरी,आचार्य धुव ,देव वार्ष्णेय, कुशाग्र माहेश्वरी,, देवांश सोमानी, शिवकुमार,सनुज माहेश्वरी रंजनमाहेश्वरी जितेंद्र वाष्र्णेय ,राजेश माहेश्वरी , स्वतंत्र राठी ,प्रिंस राठी,संदीप मिश्रा,शांति देवी,मंजुला शर्मा,रीनू शर्मा, मनीषाशर्मा, रेखा शर्मा ,कल्पना भारद्वाज ,ममता राठी,सारिका राठी, धरती माहेश्वरी, सरिता माहेश्वरी ,लता माहेश्वरी ,मोहित देवल,देव वार्ष्णेय, मुकेश गुप्ता,प्रवीण वार्ष्णेय, विशाल खाशट, राजा बाबू वार्ष्णेय,अनूप माहेश्वरी,दीपू माहेश्वरी , रोहित माहेश्वरी, लालू माहेश्वरी ,देवकीनंदन शास्त्री,टिंकू वाष्र्णेय, आकाश वाष्र्णेय,चारू सोमानी,नरेंद्र गरल,आशीष बशिष्ठ,गिरीश गिरि ,मुनीशगिरि ,सुभाष बाहेती,जय प्रकाश माहेश्वरी ,कपिल माहेश्वरी ,रवि वाष्र्णेय, सोमेन्द्र तोष्णीवाल, हरिओम शर्मा, नीरज तोष्णीवाल ,राजेश माहेश्वरी (गुरु जी) सुवीन माहेश्वरी, हरिश्व्वर राठी,चंद्रपाल माहेश्वरी,भुवनेश्वर राठी ,सुभाष चन्द्र माहेश्वरी आदि हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

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