खास बातें
शावर से नहाने पर खर्च होता है प्रति व्यक्ति 284 लीटर पानी
वाटर फुट प्रिंट मैपिंग के जरिए समझाई जल की उपयोगिता
डॉ. शिवानी बोलीं, जीवन के लिए जल संरक्षण अनमोल
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी में आयोजित विश्व जल दिवस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, इंडिया की प्रोजेक्ट ऑफिसर नेहा भटनागर बतौर मुख्य वक्ता बोलीं, अगर हम पानी की बर्बाद इसी प्रकार करते रहे तो 2050 तक भयावह संकट का सामना करना होगा। पीपीटी पर भारत के मानचित्र के कुछ भाग को सुनहरे पीले रंग से प्रदर्शित किया। साथ ही वाटर फुट प्रिंट मैपिंग को समझाते हुए बोलीं, रोजमर्रा की जिंदगी में एक व्यक्ति पानी का कितना उपयोग करता है। उन्होंने वाटर फुट मैपिंग के दो प्रकार – प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष पर भी प्रकाश डाला। बाथिंग, वाशिंग, गार्डनिंग और फ्लैशिंग सभी प्रत्यक्ष वाटर फुट मैपिंग के प्रकार हैं। उदाहरण देते हुए बोलीं, एक व्यक्ति अगर शावर का उपयोग करता है तो वह लगभग 264 लीटर जल व्यर्थ करता है। अप्रत्यक्ष वाटर फुट प्रिंटिंग का उदाहरण देते हुए बताया, प्लास्टिक के एक मग कॉफ़ी के निर्माण के लिए भी कम से कम 208 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। वह बोलीं, हमें संरक्षित जल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। इससे पूर्व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, इंडिया की प्रोजेक्ट ऑफिसर नेहा भटनागर और डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की चेयरपर्सन डॉ. शिवानी एम कौल ने दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
जल संरक्षण के प्रबल पैरोकार श्री गंभीर सिंह ने अपनी केस स्टडी और अनुभवों को साझा करते हुए बताया, उन्होंने छोटी-छोटी नालियों का जुड़ाव करके करुला नदी को ग्रामीणों और कृषकों के लिए बहुत उपयोगी बना दिया है। डिपार्टमेंट ऑफ़ फिजियोथेरेपी की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की चेयरपर्सन डॉ. शिवानी एम कौल ने सभी को जल संरक्षण के प्रति आगाह करते हुए बताया, प्रकृति ने हमें अभी तक बहुत तक बहुत सी अनमोल चीजें प्रदान की हैं। अब समय आ गया है, हम पर्यावरण और प्रकृति के प्रति सजग रहे। इस मौके पर डॉ. कीर्ति सचान, डॉ. फरहान खान, डॉ. शीतल मल्हान, डॉ. उज्मा सैयद, डॉ. आसमां, डॉ. अंकिता के अलावा बीपीटी, डीपीटी, एमपीटी प्रथम वर्ष के लगभग 55 छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


























