अयोध्या. भले ही अभी सभी चरणों का मतदान पूरा न हुआ हो लेकिन राजनीति के पंडित सियासी मायने कहां कहां से निकालते हैं. इसकी बानगी है अयोध्या के डीएम का आवास बोर्ड. जी हां यहां डीएम है नितीश कुमार. नितीश कुमार बिहार से ताल्लुक रखते हैं. बुधवार को जब उनके आवास का बोर्ड बदला गया तो इसके कई सियासी मायने निकाले जाने लगे. दरअसल यहां पर अभी तक जो बोर्ड लगा था. वह बोर्ड अभी तक भगवा रंग का था लेकिन अब जो बोर्ड लगाया गया है. उसका कलर हरा है. ऐसे में राजनीति और नौकरशाही के गलियारों में ये चर्चा का विषय बना हुआ है.वहीं डीएम नीतीश कुमार का कहना है कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं मालूम है, लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी से बात करिए जबकि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है.

दरअसल 24 अक्टूबर 2021 को अयोध्या के तत्कालीन जिला अधिकारी अनुज कुमार झा का ट्रांसफर हुआ था. उनके स्थानांतरण के पहले से ही अयोध्या जिलाधिकारी आवास का नए सिरे से निर्माण शुरू हुआ था. इसी कारण जिलाधिकारी के आवास को लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में अस्थाई तौर पर स्थानांतरित कर दिया गया था.
अयोध्या के मौजूदा जिलाधिकारी नीतीश कुमार ने जब से कार्यभार ग्रहण किया तब से उनका यही आवास और कैंप कार्यालय है. उस समय जिलाधिकारी के इस आवास के बाहर जो बोर्ड लगाया गया उसका रंग भगवा था और उस पर सफेद रंग से जिलाधिकारी आवास लिखा गया था. बुधवार को अचानक इसी बोर्ड को बदल दिया गया.
अब हरे रंग के बोर्ड पर सफेद रंग से जिलाधिकारी आवास लिखा हुआ है. रंगों के इसी बदलाव के बीच सियासी चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है कि अचानक बोर्ड का रंग बदलने की पीछे की वजह क्या है? अब जाहिर है सियासी चर्चा होगी तो उसके मायने भी निकाले जाएंगे और इसको लेकर अटकलें भी लगाई जाएंगी.
बताया जा रहा है कि अयोध्या के डीएम का बोर्ड उस समय लगा था. जब यूपी में बीजेपी की सरकार बनी थी. ऐसे में बोर्ड का रंग भगवा कर दिया गया था. इस दौरान कई डीएम तो बदल गए लेकिन रंग नहीं बदला. अभी चार पांच महीने पहले ही नितीश कुमार का ट्रांसफर बरेली से अयोध्या हुआ है. ऐसे में जब चुनाव का छठा चरण का मतदान तीन मार्च को है. इसके एक दिन पहले भगवा की जगह हरा रंग का बोर्ड लगना सियासी गलियारों से लेकर नौकरशाही के दफ्तरों तक चर्चा का विषय बना हुआ है.
कयास ये लगाए जा रहे है कि कहीं ये सत्ता परिवर्तन का संकेत तो नहीं है. हालांक नितीश कुमार सीएम के पसंदीदा अफसरों वाली लिस्ट में हैं. उन्होंने लखीमपुर खीरी में स्कूलों की हालत सुधारने में काफी अच्छा काम किया था. जिसकी कई बार सीएम प्रशंसा भी कर चुके हैं. यही काम उन्होंने बरेली में भी किया था. हालांकि बोर्ड बदलने के क्या सियासी मायने हैं या फिर एक साधारण प्रक्रिया है. ये तो डीएम ही बता सकते हैं लेकिन उन्होंने ऐसे समय ये काम किया है जब सियासी चर्चा होना इस पर लाजमी है. वह भी तब जब मतदान हो रहा हो और दस मार्च को परिणाम आने वाले हो.

























