- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग का छठा दिन
महोली (सीतापुर)। संतो को कष्ट नहीं देना चाहिए, संतों का परिहास करने वाले व कष्ट देने वाले को दुख भोगना पड़ता है। यह बात कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में आयोजित सत्संग के छठे दिन स्वामी ओमकारानंद सरस्वती जी ने कही।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सात दिवसीय आयोजन के छठे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण पर चर्चा करते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती के कृपा पात्र शिष्य स्वामी ओमकारानंद सरस्वती ने अक्रूर के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण व बलराम को मथुरा ले जाने और गोपियों के विरह की कथा सुनाई। स्वामी जी ने कहा भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन से जाने लगते हैं तो मां यशोदा बेहोश हो जाती हैं, भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ढांढस बंधाते हैं। उन्होंने कहा कि अक्रूरजी रथ लेकर कुछ दूर आगे बढ़े थे कि गोपियां जमीन में लेटी हुई दिखीं। पास में रथ के पहुंचते ही गोपियां रथ में लिपट गई। भगवान ने उनको समझाया और मथुरा के लिए प्रस्थान किया। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार से आए सर्वेशानंद सरस्वती जी, आश्रम समिति के संरक्षक डाॅ. रामजीदास टंडन, अध्यक्ष अवधेश वर्मा, धर्मेंद्र मिश्र, राजेंद्र अग्रवाल, केवलराम अग्रवाल, महेश गुप्ता, श्रीनाथ बाजपेई, शिवबरदानी लाल शुक्ल, अनुरुद्ध त्रिवेदी, मुनुआ सिंह, हनुमान दीक्षित, राजीव पाल, विनोद त्रिवेदी, कन्हैया लाल, डाॅ. रेनू वर्मा, मंजू मिश्रा, कविता गुप्ता, अंजली मिश्रा, दिव्या त्रिवेदी, अपर्णा मिश्रा आदि भक्त मौजूद रहे।




























