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42 साल की उम्र में 55 बार रक्तदान कर चुके हैं हरि कृष्ण वर्मा, रक्तदान कर मनाया अपना 42 वां जन्मदिन

बदायूँ : वैसे तो जन्मदिन पर केक काटने। रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ पार्टी मनना आम बात है। इस आम को खास बनाने का काम मै श्यामलाल नाती की दुकान टिकटगंज (बदायूं) के पार्टनर, सर्राफा व्यवसायी ने किया है ,रक्तदान को लेकर अभी भी लोगों में कई भ्रांतियां हैं। लेकिन इससे उलट कई लोग ऐसे हैं जो रक्तदान कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। इनमें से एक है हरि कृष्ण वर्मा जो अपनी उम्र से भी ज्यादा बार रक्तदान कर औरों के लिए प्रेरणा साबित हो रहे हैं। वर्मा ने अपने 42 बें जन्मदिन पर 55 वीं बार रक्तदान कर समाज मे एक मिसाल पेश किया है।अभी उनकी उनकी उम्र 42 बर्ष है लेकिन अभीतक 55 बार रक्तदान कर चुके हैं।उनका कहना है कि वो साल में तीन बार रक्तदान करते हैं,,

हरि कृष्ण वर्मा ने बताया कि 27 अगस्त के दिन उनका जन्मदिन होता है, इस दिन को किसी जरूरतमंद की मदद करके मुझे सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। वर्मा ने कहा कि ब्लड बैंकों में लगातार रक्त की कमी हो रही है। इस स्थिति में रक्तादान सभी को करना चाहिए। रक्तदान किसी की जिंदगी बचा सकता है। रक्तदान को महादान बताते हुए वर्मा ने कहा कि इससे शरीर को कोई नुकसान नही होता।यदि आप दान करने का जज्बा रखते हैं तो कुछ ऐसा दान किजिए जो किसी के काम आ सके, किसी की जिंदगी को बचा सके, इसी बात को अमल में लाते हुए आमजन को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनकी उम्र 42 साल हैं और अभी तक करीब 55 बार रक्तदान कर चुके हैं।

हरि कृष्ण ने बताया कि बचपन में उन्होंने कई केसों में देखा कि किसी को जब भी रक्त की आवश्यकता होती थी तो क्या अपने क्या गैर सभी लोगों को अलग अलग तरीके के बहाने बनाकर रक्त देने से मना करते देखा इसी कारण कई लोगों को मौत के मुँह में समाते हुए भी देखा इसी से मुझे रक्तदान की प्रेरणा मिली और जरुरतमंद को रक्त देना मैंने अपना धर्म बना लिया।तभी से मन मे ठान लिया कि वो साल में तीन बार रक्त दान करेंगें जो आजतक निरन्तर जारी है।


रक्तदान के अलावा भी समाज सेवा को अपना धर्म मानते हुए,गौशालाओं में भूसा दान करना,पूरे लॉक डाउन में बंदरों को कुत्तों को भोजन कराना, हर साल सर्दियों में गरीबों को ऊनी वस्त्र, कम्बल वितरण करना,उनको पैसों व राशन की मदद करना उनका जुनून है, उन्होंने बताया कि सन 1998 से गांव व शहर के स्कूलों के प्रतिभाभान छात्र छात्राओं के पास होने पर उन्हें प्रोत्साहित करने के लिये चांदी के सिक्के,शील्ड,प्रशस्ति पत्र आदि ब खेलकूद में होनहार छात्र छात्राओं व देश भक्ति गीतों पर डांस कंपटीशन मैं भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को में सम्मानित करता हूं उन्हें सम्मानित करने पर मुझे खुशी मिलती है,बहीं रक्तदान करने से मुझे आत्मबल मिलता है मुझे किसी की सहायता करने पर सुख शांति समृद्धि खुशाली महसूस होती है किसी की सहायता करना मेरा जुनून है,और मेरे इस जुनून में मेरा परिवार,मेरी मां मेरी पत्नी,मेरे भाई का परिवार, मेरे बच्चे भी पूरी ताकत के साथ मेरे कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते हैं। वर्मा का कहना है कि इन कार्यों को करने की प्रेरणा मुझे मेरे बाबा श्यामलाल मां आशा देवी पिता कृष्ण गोपाल वर्मा व ईस्वर के आर्शीवाद से मिलती है।

वर्मा का कहना है की लोगों में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं लेकिन में साल में तीन बार ऐसा करता हूँ, रक्तदान करने से मेरे शरीर में कोई कमी नहीं आती है बल्कि काम करने की गति और तेज हो जाती है। इसलिए रक्तदान करते रहना चाहिए।रक्तदान करने के लिये लोगों को जागरूक करने का बीड़ा भी हरि कृष्ण वर्मा ने उठा रखा है।वर्मा के इस जज्बे को स्वदेश केसरी भी सेल्यूट करता है,और ऐसे सच्चे समाज सेवी की सेवा को अपनी न्यूज के माध्यम से लोगों तक पहुंचाकर आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने का एक छोटा सा प्रयास है।आपका रक्त किसी की ज़िंदगी बचा सकता है।स्वदेश केसरी अपने सभी पाठकों से अपील करता है कि आप खुद भी रक्तदान करिये व दूसरों को रक्तदान करने के लिये प्रेरित करिये।

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