- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग का तीसरा दिन
महोली (सीतापुर)। भगवत्प्राप्ति के मार्ग पर चलने के लिए साधक को दृढ़ संकल्पित होना आवश्यक है। यह बात कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में आयोजित सत्संग के तीसरे दिन स्वामी ओमकारानंद सरस्वती जी ने कही।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सात दिवसीय आयोजन के तीसरे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण पर चर्चा करते हुए महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती के कृपा पात्र शिष्य स्वामी ओमकारानंद सरस्वती ने कहा कि काम और लोभ अशांति का कारण हैं। स्वामी जी ने बताया कि हिरण्यकश्यप काम और हिरण्याक्ष लोभ के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि जीव के शरीर में काम और लोभ के रूप में हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष मौजूद हैं। स्वामी जी ने कहा कि लोभ और काम के दमन के लिए भगवान का आश्रय आवश्यक है। स्वामी जी ने बताया कि नीति युक्त कार्य, वस्तु आदि का परिणाम शाश्वत होता है जबकि रुचिकर कार्य, वस्तु आदि का कष्टकारी होता है। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर हनुमान दीक्षित, तुरी चैतन्य, आचार्य शिवम राज योगी, पं. राम गोपाल तिवारी, ब्रह्मचारी राकेश, मुनुआ सिंह, रामनाथ शुक्ल, डाॅ. रेनू वर्मा, साधना श्रीवास्तव, अपर्णा मिश्रा, दिव्या त्रिवेदी, कांती मिश्रा, सरिता गुप्ता आदि श्रृद्धालु मौजूद रहे।


























