बदायूं। ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी संघ का ऑनलाइन उपस्थिति और गैर-विभागीय कार्यों के खिलाफ विरोध अब तेज हो गया है। आज मंगलवार को जिले भर के सचिव बदायूं कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी, सीडीओ, डीपीआरओ व पीडी के कार्यालय पहुंच कर सभी को ज्ञापन सौंपा। सचिवों ने काली पट्टी बांधकर शांति-पूर्ण सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की।

कल की बैठक के बाद आज आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

सोमवार को हुई जनपद स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में सचिवों ने सर्वसम्मति से ऑनलाइन उपस्थिति का कड़ा विरोध किया था।
बैठक में कहा गया कि सचिवों को कभी ब्लॉक, कभी सचिवालय, कभी जिला मुख्यालय जाना पड़ता है—ऐसी स्थिति में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना असंभव और अव्यवहारिक है।
यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो 1 दिसंबर से आंदोलन की घोषणा की गई थी, जिसका आज विधिवत आरंभ कर दिया गया।

जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन-ये रखी प्रमुख मांगें

सचिवों ने ज्ञापन में मांग की—

  • ऑनलाइन उपस्थिति तुरंत वापस ली जाए,
  • ग्राम सचिवों पर गैर विभागीय कार्यों का अनावश्यक दबाव बंद हो,
  • फील्ड में कार्य करने वाले सचिवों की वास्तविक परिस्थितियों को सरकार समझे

सचिवों का आरोप है कि
“हम गांव-गांव विकास कार्य कर रहे हैं। सरकार हम पर अविश्वास दिखा रही है। यदि सचिव काम न करते तो गांवों का विकास कैसे होता?”

आंदोलन की टाइमलाइन घोषित

सचिवों ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति घोषित की है—

1 से 4 दिसंबर– काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्यों का शांतिपूर्ण संपादन

5 दिसंबर-प्रदेश स्तरीय निर्देशों के अनुसार धरना कार्यक्रम,सभी सरकारी व्हाट्सऐप ग्रुपों से सचिव स्वयं को अलग करेंगे
10 दिसंबर -सचिव निजी वाहनों का उपयोग बंद करेंगे
15 दिसंबर -सचिव अपने डोंगल ब्लॉक कार्यालय में जमा कर देंगे

सचिवों का बयान

सचिवों का कहना है कि –“हम गांवों के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं को पहुंचाते हैं। यदि ऑनलाइन उपस्थिति थोप दी गई तो फील्ड कार्य पूरी तरह प्रभावित होगा। सरकार हमारी बात सुने, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।”

प्रशासन सतर्क -जिलाधिकारी बदायूं ने ज्ञापन प्राप्त कर बताया कि
मामले को संबंधित विभाग तक पहुंचाकर समाधान पर विचार किया जाएगा।हालांकि सचिवों के आंदोलन से ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

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