

बदायूं, 28 अक्टूबर।कहते हैं-“पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती, बल्कि कई बार इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल भी बन जाती है।” ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण बदायूं में देखने को मिला, जब यातायात पुलिस के सिपाही प्रभात श्रीवास्तव ने ड्यूटी के दौरान सूझबूझ और मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए एक व्यक्ति की जान बचा ली।
इंद्राचौक पर बना भावुक दृश्य — जब वर्दी ने निभाई इंसानियत की ड्यूटी
जानकारी के अनुसार, मंगलवार की दोपहर इंद्राचौक चौराहा पर अचानक एक पिकअप वाहन बीच सड़क पर रुक गया, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनने लगी। मौके पर यातायात व्यवस्था संभाल रहे सिपाही प्रभात श्रीवास्तव ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि पिकअप चालक बिना हरकत के सीट पर झुका हुआ है।
बिना देर किए प्रभात श्रीवास्तव ने वाहन का दरवाजा खोला और चालक की नब्ज जांची। चालक बेहोश अवस्था में था। उन्होंने तुरंत अपने प्रशिक्षण और अनुभव का उपयोग करते हुए सीपीआर (Cardio Pulmonary Resuscitation) देना शुरू किया और पास मौजूद लोगों से एंबुलेंस बुलाने को कहा।
समय पर मिली मदद से बची जान
कुछ मिनटों की मेहनत के बाद चालक में हल्की सांसें लौटने लगीं। सिपाही प्रभात ने खुद उसे उठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि चालक को हार्ट अटैक आया था और अगर कुछ देर और हो जाती तो उसकी जान नहीं बच पाती।
डॉ. राजेश कुमार, जिला अस्पताल के चिकित्सक ने कहा, “मरीज को समय पर सीपीआर दिया गया और तुरंत अस्पताल लाया गया, जिससे उसकी जान बच सकी। यह पुलिसकर्मी की उत्कृष्ट तत्परता और प्रशिक्षण का नतीजा है।”
पुलिस विभाग और जनता ने की जमकर सराहना
इस घटना की चर्चा पूरे शहर में है। सोशल मीडिया पर लोग सिपाही प्रभात श्रीवास्तव की वीडियो और फोटो शेयर कर उन्हें “रियल हीरो” बता रहे हैं।
बदायूं के पुलिस अधीक्षक ने भी प्रभात की प्रशंसा करते हुए कहा,
“सिपाही प्रभात श्रीवास्तव ने जिस तरह से इंसानियत की मिसाल पेश की है, वह पूरे विभाग के लिए गौरव की बात है। ऐसे पुलिसकर्मी ही पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कड़ी मजबूत करते हैं।”
समाज और पुलिस के लिए बना प्रेरणा संदेश
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की जान बचाने की कहानी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मानवीयता का सशक्त संदेश भी है।
जहां आज समाज में अक्सर पुलिस को लेकर नकारात्मक छवियां दिखाई जाती हैं, वहीं प्रभात श्रीवास्तव जैसे कर्मठ और संवेदनशील सिपाही साबित करते हैं कि पुलिस की वर्दी सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा और करुणा की पहचान भी है।
बदायूं के लोगों ने कहा — “सलाम है ऐसे वर्दीवालों को”
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि प्रभात श्रीवास्तव जैसे पुलिसकर्मी जनता के लिए आदर्श उदाहरण हैं। उनकी सतर्कता से न सिर्फ एक घर उजड़ने से बच गया, बल्कि इंसानियत पर भरोसा भी और मजबूत हुआ।
संभावित शीर्षक:
- ड्यूटी पर मानवता: सिपाही प्रभात श्रीवास्तव ने दिखाई तत्परता, बचाई एक परिवार की उम्मीद
- पुलिस की वर्दी में इंसानियत — बदायूं के कांस्टेबल की सूझबूझ से टली एक बड़ी त्रासदी
क्या आप चाहेंगे कि मैं इस खबर के लिए एक अखबार-जैसी विजुअल हेडलाइन इमेज भी बना दूँ जिसमें “रियल हीरो कांस्टेबल प्रभात श्रीवास्तव”, “CPR से बची जान”, और “बदायूं ट्रैफिक पुलिस” को एक फ्रेम में दिखाया जाए?


























