डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने नरेंद्र गरल के गीत-संग्रह ‘पंख’ और डॉ. गीतम सिंह की पुस्तक ‘क्या ज़माना था’ का किया लोकार्पण, प्रदेशभर से जुटे साहित्यकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा का स्थापना दिवस समारोह राजधानी लखनऊ में साहित्यिक गरिमा, उत्साह और सृजनशीलता के वातावरण में भव्य रूप से आयोजित किया गया। समारोह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों एवं विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता कर आयोजन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में साहित्यकारों के सम्मान के साथ पुस्तकों के लोकार्पण और साहित्यिक संवाद का विशेष आयोजन हुआ।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की प्रदेश के सभी 75 जिलों में इकाइयां सक्रिय हैं। स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न जिला इकाइयों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान प्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों को एक मंच पर लाने और साहित्यकारों के बीच आपसी संवाद को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
नरेंद्र गरल के गीत-संग्रह ‘पंख’ का हुआ लोकार्पण
समारोह का विशेष आकर्षण उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, बदायूं इकाई के संरक्षक एवं वरिष्ठ गीतकार नरेंद्र गरल के गीत-संग्रह ‘पंख’ का लोकार्पण रहा। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पुस्तक का लोकार्पण किया।
नरेंद्र गरल लंबे समय से साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपने गीतों के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं एवं जीवन के विविध पक्षों को अभिव्यक्ति देते रहे हैं। उनके गीत-संग्रह ‘पंख’ का प्रदेश के प्रमुख साहित्यिक मंच पर लोकार्पण बदायूं के साहित्यिक जगत के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
डॉ. गीतम सिंह की पुस्तक ‘क्या ज़माना था’ भी हुई लोकार्पित
समारोह में उत्तर प्रदेश साहित्य सभा, बदायूं के वर्तमान संयोजक डॉ. गीतम सिंह की पुस्तक ‘क्या ज़माना था’ का भी लोकार्पण किया गया। एक ही मंच से बदायूं के दो प्रमुख साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण होने से समारोह में बदायूं की साहित्यिक सक्रियता विशेष रूप से चर्चा में रही।
दोनों पुस्तकों के लोकार्पण को साहित्यकारों ने बदायूं की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और निरंतर जारी रचनात्मक गतिविधियों का महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व बताया।
प्रदेशभर के साहित्यकारों का जुटा जमावड़ा
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की केंद्रीय कार्यकारिणी की उपाध्यक्षा डॉ. सोनरूपा विशाल ने बताया कि स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश के लगभग 30 जिलों से साहित्य सभा के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। इसके अलावा लखनऊ के बड़ी संख्या में साहित्यकार, साहित्यप्रेमी, प्रशासनिक अधिकारी तथा राजनीति एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस समारोह का उद्देश्य केवल संगठन की वर्षगांठ मनाना नहीं, बल्कि प्रदेशभर के साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना और विभिन्न जिलों में हो रही साहित्यिक गतिविधियों को परस्पर जोड़ना भी है।
कई दिग्गज साहित्यकार रहे मौजूद
कार्यक्रम में राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता, वरिष्ठ कवि प्रवीण शुक्ल, डॉ. विष्णु सक्सेना, डॉ. शिवओम अंबर, बलराम श्रीवास्तव तथा उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रधान डॉ. सर्वेश अस्थाना सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
समारोह में साहित्य, संस्कृति और समाज के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने के साथ-साथ समय की चुनौतियों और मानवीय संवेदनाओं को शब्द देने का कार्य करता है। ऐसे आयोजन साहित्यकारों को अपनी रचनात्मकता साझा करने और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने पर जोर
स्थापना दिवस समारोह में उत्तर प्रदेश की साहित्यिक विरासत, वर्तमान दौर के सृजन और साहित्यकारों के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सक्रिय साहित्यकारों को एक मंच पर लाकर साहित्यिक गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।
समारोह में यह भावना भी सामने आई कि साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर समाज की संवेदनाओं, संस्कृति और सरोकारों से जुड़ा रहे। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा विभिन्न जिलों की इकाइयों को सक्रिय करते हुए साहित्यिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लखनऊ में आयोजित यह स्थापना दिवस समारोह साहित्य, सम्मान और सृजन का ऐसा संगम बनकर सामने आया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न अंचलों की साहित्यिक प्रतिभाओं ने एक-दूसरे से संवाद किया। वहीं बदायूं के दो साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण समारोह की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

























