सीओ सिटी के नाम पर मांगे थे डेढ़ लाख रुपये, पुलिस ने 1.07 लाख रुपये किए बरामद; तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

बदायूं। बदायूं में बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 1.40 लाख रुपये की कथित वसूली करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में खुद को भाजपा नेता बताने वाले अमन मयंक शर्मा और उसके साथी अजय शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से वसूली गई रकम में से 1 लाख 7 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।

मामले में आरोप है कि आरोपियों ने सीओ सिटी राहुल पाण्डेय के नाम पर रकम की मांग की और पीड़ित पक्ष को झूठे बलात्कार के मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी।

महिला की शिकायत से शुरू हुआ मामला

पुलिस के अनुसार कुंवरगांव थाना क्षेत्र की एक महिला ने एसएसपी कार्यालय में शिकायत देकर कैली गांव निवासी विजेंद्र पाल और विनय के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शिकायत की जांच सीओ सिटी राहुल पाण्डेय द्वारा की जा रही थी।

इसी मामले में कैली गांव निवासी संतोष आरोपियों का पक्ष रखने के लिए अधिकारियों के पास पहुंचा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अजय शर्मा से हुई। आरोप है कि अजय ने खुद को मामले की जानकारी रखने वाला बताते हुए कहा कि उसके और उसके साथियों के पुलिस अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं तथा पैसे देकर मामले में राहत दिलाई जा सकती है।

डेढ़ लाख रुपये देने का बनाया दबाव

आरोप है कि अजय शर्मा ने अमन मयंक शर्मा और अंकुर उपाध्याय के साथ मिलकर संतोष को करीब डेढ़ लाख रुपये देने के लिए दबाव बनाया। बार-बार फोन कर जेल भेजने की धमकी दिए जाने के बाद पीड़ित पक्ष ने कथित तौर पर कुल 1.40 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए।

बताया गया कि इसमें 70 हजार रुपये पीएनबी खाते से, 40 हजार रुपये एचडीएफसी बैंक के एटीएम से निकाले गए। इसके अलावा 15 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से तथा 15 हजार रुपये नकद दिए गए।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

मामले की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संतोष को बुलाकर पूछताछ की गई। उसने पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी और तहरीर दी। इसके आधार पर अमन शर्मा, अजय शर्मा और अंकुर उपाध्याय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मोहल्ला चौबे, थाना कोतवाली निवासी अमन शर्मा और गांव बरातेगदार, थाना सिविल लाइंस निवासी अजय शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कथित वसूली की बात स्वीकार की और उनकी निशानदेही पर 1.07 लाख रुपये बरामद किए गए।

पुलिस के नाम पर वसूली से महकमे में मचा हड़कंप

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि कथित तौर पर पुलिस अधिकारी के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल कर रकम वसूली गई। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस प्रकरण में नामजद तीसरे आरोपी की क्या भूमिका रही और वसूली की रकम का इस्तेमाल कहां किया जाना था।

फिलहाल दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच के बाद पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

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