लखनऊ, 23 जून 2026। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में कल सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश छात्र और युवा बताए जा रहे हैं। कई लोग घायल हैं, जिन्हें केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार, अलीगंज के उषा मेहता मार्ग स्थित भवन में नीचे के तल पर पेट शॉप और क्लीनिक, जबकि ऊपरी मंजिलों पर लाइब्रेरी/कोचिंग और एनीमेशन-गेमिंग स्टूडियो संचालित था। दोपहर करीब तीन बजे आग फैलने के बाद पूरे भवन में तेजी से धुआं भर गया। धुएं और आग के बीच फंसे युवाओं में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल से छलांग लगाई, जबकि कई लोग बाथरूम और अन्य कमरों में छिप गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग और धुएं के कारण बाहर निकलने का रास्ता ढूंढना मुश्किल हो गया था। दमकल विभाग ने कई फायर टेंडरों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से आग पर काबू पाया। बचाव दलों ने आसपास के भवनों की ओर से पहुंच बनाकर लोगों को निकालने का प्रयास किया। ट्रॉमा सेंटर में कई लोगों को लाया गया, जहां 15 को मृत घोषित किया गया।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी में भवन में आपातकालीन निकास व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि भवन का मुख्य प्रवेश द्वार बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम से संचालित था, जिससे आग के दौरान बाहर निकलने में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच जारी है; एसी कंप्रेसर फटने की बात भी सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, SIT गठित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल और ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जिसे सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गई है।

यह हादसा केवल एक इमारत में लगी आग नहीं, बल्कि कोचिंग, लाइब्रेरी, हॉस्टल, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय होना और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई होना जरूरी है।

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