तेज हवाओं और अंधेरे के बीच टॉर्च की रोशनी में चला तीन घंटे का रेस्क्यू अभियान, पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा और युवाओं के जज्बे की हो रही सराहना,,

बदायूं। जनपद के एक गांव में मानवता, पशु प्रेम और साहस की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। तेज हवाओं, घुप अंधेरे और जोखिम भरे हालात के बीच एक पशु प्रेमी और उसकी टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना जल जीवन मिशन की ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर एक बेजुबान बंदर का सफल रेस्क्यू किया। इस साहसिक कार्य की ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर जमकर प्रशंसा हो रही है।

जानकारी के अनुसार ग्राम पुसगवां में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्मित पानी की टंकी के अंदर कई बंदर किसी तरह अंदर पहुंच गए थे। अधिकांश बंदर तो बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन एक कमजोर और घायल अवस्था का बंदर टंकी के भीतर ही फंस गया। लगभग दो दिनों तक वह बाहर नहीं निकल सका, जिससे उसकी जान पर संकट गहराने लगा।

टंकी के ऑपरेटर विजय शर्मा को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने बंदर को बचाने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने टंकी के अंदर सीढ़ी, लकड़ी का बल्ला और रस्सी डालकर उसे बाहर निकलने का रास्ता देने की कोशिश की, लेकिन अत्यधिक कमजोर होने के कारण बंदर बाहर नहीं आ सका।

शाम को विजय शर्मा ने घटना की जानकारी अपने भाई प्रशांत शर्मा को दी। बंदर की हालत सुनकर उन्होंने तत्काल उसे बचाने का निर्णय लिया और पीपुल्स फॉर एनिमल्स बदायूं से संपर्क किया। सूचना मिलते ही पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा अपनी टीम के साथ मौके के लिए रवाना हो गए।

रात्रि करीब नौ बजे शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान आसान नहीं था। तेज हवाएं चल रही थीं और अंधेरा गहरा था। ऐसे में टॉर्च की रोशनी के सहारे विकेंद्र शर्मा अपनी टीम के साथ बिना रेलिंग वाली ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए। हर कदम पर दुर्घटना का खतरा था, लेकिन बेजुबान जीव को बचाने का संकल्प उनके हौसले से बड़ा नहीं था। करीब तीन घंटे तक चले कठिन अभियान के बाद रात 11:50 बजे बंदर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह विकेंद्र शर्मा ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बेजुबान जीव की रक्षा की, वह युवाओं के लिए प्रेरणा है। लोगों ने कहा कि आज के समय में जहां कई लोग घायल पशुओं को नजरअंदाज कर देते हैं, वहीं ऐसे पशु प्रेमी समाज में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश दे रहे हैं।

इस सफल रेस्क्यू अभियान में पीपुल्स फॉर एनिमल्स की टीम, प्रवेश शर्मा, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रशांत सागर, पवन राठौर, जुबेर, केशव ठाकुर तथा पुलिस प्रशासन का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

ग्रामीणों ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना साबित करती है कि यदि इंसान संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास के साथ आगे बढ़े तो किसी भी बेजुबान जीव का जीवन बचाया जा सकता है। यह रेस्क्यू केवल एक बंदर को बचाने की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, पशु प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

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