बदायूं से प्रदीप कुमार शर्मा बिल्सी से ललित मोहन वार्ष्णेय की रिपोर्ट

बदायूं। कई दिनों से लगातार चल रहे धरना-प्रदर्शन और चेतावनियों के बाद आखिरकार भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का सब्र टूट गया। सोमवार को हजारों किसानों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद बैंक प्रशासन को झुकना पड़ा और रियोनाई व निजामपुर शाखाओं के स्थानांतरण आदेश को स्थगित करना पड़ा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त किया।

पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत भाकियू (टिकैत) के कार्यकर्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र सिंह यादव एवं जिलाध्यक्ष रामा शंकर शंखधार के नेतृत्व में आरटीओ कार्यालय पर एकत्र हुए। यहां से किसानों का विशाल जुलूस वाहनों और ट्रैक्टरों के साथ नारेबाजी करते हुए लालपुल, कचहरी रोड, इंदिरा चौक और दातागंज तिराहा होते हुए नवादा स्थित भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचा।

क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचने के बाद किसानों ने बैंक प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए घेराव कर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान किसानों का आरोप था कि ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक शाखाओं को हटाकर आम जनता और किसानों को परेशान किया जा रहा है।

धरना स्थल पर भारी भीड़ और अव्यवस्थाओं को देखकर किसान आक्रोशित हो गए और मुख्य सड़क पर चक्काजाम कर दिया। इससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को संभाला।

इसके बाद पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में बैंक अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक वार्ता चली। शुरुआत में बैंक अधिकारियों ने मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन किसान लिखित आदेश की मांग पर अड़े रहे। आखिरकार बैंक प्रबंधन को डीजीएम स्तर से आदेश जारी कर रियोनाई और निजामपुर शाखाओं के स्थानांतरण आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना पड़ा।

लिखित आदेश मिलते ही किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। जिलाध्यक्ष रामा शंकर शंखधार ने कहा कि किसानों की एकजुटता के आगे बैंक प्रशासन को झुकना पड़ा और यह किसानों की बड़ी जीत है।

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। सभा को चौधरी शिशुपाल सिंह, दिनेश यादव, विनोद बाबू सक्सेना, मुकेश यादव, पप्पू प्रधान, अलका यदुवंशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कहा कि किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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