

बदायूं। बदायूं पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर देशभर के युवाओं से साइबर ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार युवतियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर बैंक और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से रुपये ऐंठ रहे थे। अब तक की जांच में करीब 4.50 लाख रुपये की ठगी और 10 एनसीआरपी शिकायतें सामने आई हैं।
पुलिस के अनुसार, 30 दिसंबर को साइबर क्राइम थाना बदायूं में तैनात उपनिरीक्षक रजत यादव द्वारा प्रबंध पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही थी। जांच के दौरान नौकरी के नाम पर ठगी से जुड़ी पांच शिकायतें सामने आईं। मुकदमा दर्ज कर जब मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया गया तो उनकी लोकेशन नई सराय, कोतवाली सदर क्षेत्र में पाई गई।
लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम ने जब एक गली में बने मकान पर दबिश दी तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। एक छोटे से कमरे में फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा था, जहां एक युवक लैपटॉप पर काम कर रहा था और तीन युवतियां मोबाइल फोन से अलग-अलग राज्यों के युवाओं को कॉल कर नौकरी का झांसा दे रही थीं। पुलिस ने चारों को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर एक अन्य युवती को भी गिरफ्तार किया गया।
वर्क इंडिया वेबसाइट से करते थे ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी वर्क इंडिया वेबसाइट के माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश के युवाओं को बैंक व फाइनेंस कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उनसे रुपये ट्रांसफर कराए जाते थे। आरोपी बातचीत के दौरान अपने असली नामों का इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि फर्जी नामों से खुद को एचआर अधिकारी या कंपनी प्रतिनिधि बताते थे।
गिरफ्तार आरोपी
- विवेक पुत्र सुरेश (मास्टरमाइंड, निवासी गोविंद, थाना मूसाझाग)
- आकांक्षा पटेल पुत्री विजेंद्र सिंह (निवासी बरातेगदार, सिविल लाइंस)
- अंशु पटेल पुत्री दीपक सिंह (निवासी लखनपुर, सिविल लाइंस)
- ईशा साहू पुत्री प्रेम शंकर (निवासी नगर पंचायत गुलड़िया, थाना मूसाझाग)
- मीनाक्षी पुत्री राजकुमार सिंह (निवासी बरायमय खेड़ा, कोतवाली उझानी) शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बरामदगी–
- 1 लैपटॉप
- 1 प्रिंटर
- माउस व चार्जर
- 7 स्मार्ट फोन
- 4 कीपैड मोबाइल
- 23 सिम कार्ड
- एचडीएफसी बैंक मुंबई की फर्जी स्टांप मोहर
- हाजिरी रजिस्टर
- 4 कॉपियां
- किरायानामा की फोटो कॉपी बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही इनके बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी गहन जांच की जा रही है।


























