बदायूं। उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी संघ की संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर बदायूं जनपद के सचिवों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश स्तर से मिले निर्देशों पर विस्तार से चर्चा की गई और ग्राम पंचायत सचिवों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के खिलाफ सर्वसम्मति से विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।

ऑनलाइन उपस्थिति का सचिवों ने किया विरोध — कहा, “यह व्यवस्था जमीनी हकीकत को नहीं समझती”

बैठक में मौजूद ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित ऑनलाइन उपस्थिति (Online Attendance System) ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति और कार्यशैली को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है।

सचिवों का तर्क:
  • सचिवों को कभी ब्लॉक, कभी सचिवालय और कभी जिला मुख्यालय पर कार्यों के लिए जाना पड़ता है।
  • ऐसे में निश्चित समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना संभव नहीं है
  • सचिव पहले ही क्षेत्र में लगातार दौरा करते हैं—जनसुनवाई, योजनाओं की मॉनिटरिंग, विकास कार्यों की प्रगति, पंचायत की बैठकें, रजिस्टर अपडेट, जनकल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन…
  • सचिवों का कहना है कि यदि वे काम न कर रहे होते, तो गांवों में विकास कैसे हो रहा है?
  • सचिवों ने टिप्पणी की—“सरकार को लग रहा है कि सचिव काम नहीं करते, लेकिन गांव का विकास हमारे कार्य का प्रमाण है।”
“ऑनलाइन उपस्थिति लागू हुई तो सचिवों पर बढ़ेगा भारी दबाव”

समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की उपलब्धता, नेटवर्क का संकट और सचिवों की लगातार फील्ड विज़िट को देखते हुए यह प्रणाली व्यवहारिक नहीं है।यह व्यवस्था सचिवों पर अतिरिक्त दबाव डालेगी और उनके नियमित कार्यों में बाधा उत्पन्न करेगी।

संगठन ने सरकार को दी चेतावनी — 1 दिसंबर से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन

समन्वय समिति ने निर्णय लिया कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो सचिवों का संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।

आंदोलन का कार्यक्रम:
आज 1 दिसंबर से पूरे प्रदेश के सचिव काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे, 5 दिसंबर को सभी विकास खंडों में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन

इस दौरान सचिव अन्य विभागों के कार्यों का निषेध करेंगे और केवल आवश्यक कार्य ही करेंगे।

क्या कहा समिति के सदस्यों ने?

बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा—

“हम गांवों में 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। विकास कार्य हमारी मेहनत का नतीजा हैं। ऑनलाइन उपस्थिति हम पर अविश्वास का प्रतीक है, जिसे हम स्वीकार नहीं करेंगे।”सचिवों ने यह भी कहा कि यह निर्णय यदि लागू किया गया, तो ग्रामीण विकास कार्यों की गति प्रभावित होगी और जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ेगा।

निष्कर्ष

बदायूं में हुई इस व्यापक सहमति से साफ है कि ग्राम पंचायत सचिव ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का पुरजोर विरोध करने के लिए तैयार हैं। यदि सरकार ने नियम वापस नहीं लिए, तो आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में सचिवों का बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।

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