बदायूं/बिल्सी। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिल्सी नगर में देव दीपावली का पर्व सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम की ओर से बड़े ही भक्तिभाव और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया गया। यह वही अवसर है जब वाराणसी में गंगा तट जगमगाता है, लेकिन बिल्सी में भी यह दिन अब “मिनी काशी” के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है।सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम के महंत श्री मटरू मल शर्मा (महाराज) की पहल पर वर्षों पूर्व शुरू हुई यह अनोखी परंपरा आज भी पूरे हर्षोल्लास के साथ निभाई जा रही है। इस वर्ष भी धाम की ओर से देव दीपावली पर 11,000 दीपक नगर भर में वितरित किए गए। बालाजी धाम के कार्यकर्ताओं ने दिनभर दुकानों पर जाकर दीप बांटे, जिससे शाम होते ही पूरा नगर दीपमालाओं से जगमग हो उठा।

शाम को बालाजी धाम परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। भगवान श्री बालाजी, राम दरबार और अन्य देवी-देवताओं के दरबारों को घी के दीपों से सजाया गया। जैसे ही सूर्यास्त हुआ, नगर के घर-घर में दीप प्रज्वलित हुए और वातावरण “जय श्री बालाजी” के जयघोष से गूंज उठा।

महंत श्री मटरू माल शर्मा ने बताया कि — “देव दीपावली देवताओं की दीपावली है। यह वही दिन है जब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का संहार किया था और देवताओं ने गंगा तट पर दीप प्रज्वलित कर हर्ष मनाया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है। बिल्सी में भी यह परंपरा हमने इसी भाव से आरंभ की थी कि नगरवासियों में भक्ति, शांति और एकता की भावना बनी रहे।”

इस दिव्य आयोजन में चारु सोमानी, स्वतंत्र राठी, संजीव शर्मा, रंजन महेश्वरी, मोहित देबल, संदीप गुप्ता, सौरभ सोमानी (मिंटू), डिंपल सोमानी, मुकेश गुप्ता, पुष्किन महेश्वरी, मुनीष गिरी, राजेश माहेश्वरी, अनूप माहेश्वरी सहित अनेक श्रद्धालु और कार्यकर्ता शामिल रहे।

सिद्धपीठ के परिसर में दीपों की आभा के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। चारों ओर दीपों की सुनहरी चमक से मानो नगर “मिनी काशी” में परिवर्तित हो गया।

देव दीपावली का यह पर्व बिल्सी में सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, एकता और भारतीय संस्कृति की उज्ज्वल परंपरा का प्रतीक बन चुका है — जो हर वर्ष पूरे नगर को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करता है।

वहीं बदायूं नगर में भी श्रद्धालुओं ने अपने घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर दीप प्रज्वलित कर देव दीपावली मनाई। गली-मोहल्लों में सजावट, दीपों की रोशनी और धार्मिक गीतों की मधुर ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और प्रकाश के उत्सव में डुबो दिया।

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