1. “बैठकों में गाली-गलौज और सार्वजनिक अपमान – अब बर्दाश्त नहीं होगा”
  2. “मनरेगा में अधिकारियों पर मेहरबानी, सचिवों पर अन्याय की गाज”

बदायूँ। ग्राम पंचायत सचिवों का सब्र अब जवाब देता दिख रहा है। नगला सरकी पंचायत भवन में हुई ग्राम विकास अधिकारी-ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति की बैठक में सचिवों ने एक सुर में कहा – “अब अपमान और दोहन बर्दाश्त से बाहर है।”

सचिवों ने साफ आरोप लगाया कि जनपद स्तरीय बैठकों में उन्हें अभद्र भाषा बोलकर अपमानित किया जाता है, और अधिकारियों की यह ‘गाली-गलौज संस्कृति’ लंबे समय से चली आ रही है। समिति ने चेतावनी दी कि अगर यह रवैया तुरंत नहीं बदला तो सचिव सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।

सबसे बड़ा ग़ुस्सा बिना नोटिस और बिना स्पष्टीकरण के निलंबन पर फूटा। सचिवों ने कहा कि “मनरेगा भुगतान करने वाले कार्यक्रम अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन सचिवों पर एकतरफ़ा गाज गिरा दी जाती है। यह सीधा-सीधा अन्याय है।”

बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि राज्य व केंद्र वित्त की धनराशि में भुगतान का सारा दबाव सचिवों पर डाला जाता है, जबकि काम प्रधान कराते हैं और भुगतान प्रधान-सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। इसके बावजूद अफसर कभी प्रधान से सवाल नहीं करते, पूरा बोझ सचिवों पर डाल देते हैं।

वेतन रोकने की प्रवृत्ति पर भी सचिवों ने कड़ा विरोध जताया। सचिवों ने कहा कि “हर महीने किसी न किसी योजना में प्रगति कम दिखाकर वेतन रोक दिया जाता है। इससे मनोबल टूटता है और परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।”

समिति ने यह भी सवाल उठाया कि दो-दो महीने तक भुगतान न होने की जिम्मेदारी सचिवों पर डालना सरासर झूठ और तानाशाही है। “जब जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन, आईजीआरएस और अन्य काम लगातार हो रहे हैं, तो सचिव अनुपस्थित कैसे मान लिए जाते हैं?” सचिवों ने तर्क दिया।

बैठक के अंत में तय हुआ कि इन सभी मुद्दों पर मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा, और अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो सचिव संगठन उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा

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