





बरेली। 26 अगस्त को बरेली पुलिस ने बरेली पुलिस ने छांगूर बाबा जैसा एक बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा किया, जिसमे हिंदू युवकों को निशाना बनाकर ब्रेनवॉश, निकाह और खतना के जरिए धर्मांतरण किया जा रहा था। ये गैंग ऐसे लोगों को टारगेट करता था, जो आर्थिक या पारिवारिक रूप से कमजोर हों। पहले इनका ब्रेनवॉश किया जाता था। फिर मुस्लिम लड़कियों से शादी कराई जाती थी। आखिर में खतना करके पूरी तरह से धर्मांतरण करा दिया जाता था।
मदरसा संचालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से पुलिस को जाकिर नाइक और पाकिस्तानी इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्जा का भड़काऊ इस्लामिक लिटरेचर भी मिला। पुलिस का दावा है कि ये लिटरेचर काफी भड़काऊ है। सवाल उठता है कि यह साहित्य भारत के अंदर कैसे पहुंच रहा है और कौन इसे फैला रहा है?




इस केस की जाँच कर रहीं बरेली पुलिस की SP (साउथ) अंशिका वर्मा ने बताया- पुलिस अब तक ऐसी 3 परिवारों तक पहुंची है, जो धर्मांतरण सिंडिकेट के निशाने पर थे। इन सभी में एक बात कॉमन थी। वो ये कि तीनों परिवार लाचार या परेशान हालात में थे। सिंडिकेट ने इसी का फायदा उठाकर उन्हें अपने साथ जोड़ा। पहला पीड़ित सरकारी टीचर प्रभात उपाध्याय दृष्टिहीन था। पहली शादी टूट चुकी थी। सिंडिकेट ने उसको दूसरी शादी का सपना दिखाकर अपने साथ जोड़ा। उसे प्रभात से हामिद बना दिया।दूसरे पीड़ित ब्रजपाल के पिता की एक्सीडेंट में डेथ हो चुकी थी। खुद ब्रजपाल खुद एक एक्सीडेंट के बाद असहाय हो गया था। एक बहन का तलाक हो चुका था। ब्रजपाल नीट क्लियर नहीं कर पाया था। ये सब परेशानियां उसको इस सिंडिकेट के टच में लाईं। ब्रजपाल धर्मांतरण करके अब्दुल्ला बन गया।
तीसरा पीड़ित एक नाबालिग लड़का है। पिता जीवित नहीं थे। कमाई के लिए ये लड़का सैलून पर नौकरी करता था। उसी सैलून पर काम करने वाले सिंडिकेट मेंबर ने आर्थिक तंगी देखकर इस लड़के को अपने जाल में फंसा लिया। पहले इस लड़के को ड्रग्स एडिक्ट बनाया गया। फिर खतना करने की तैयारी थी। उससे पहले ही पुलिस सिंडिकेट तक पहुंच गई।
कहां से आईं पाकिस्तानी किताबें? ये गैंग शुरुआत में इस्लामिक लिटरेचर के जरिए लोगों का ब्रेनवॉश करता था। पुलिस को इनसे पाकिस्तानी इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्जा की तकरीरें वाली CD मिली है। इसके अलावा जाकिर नाइक की “मीडिया और इस्लाम जंग या अमन”, “हिंदू धर्म और मजहबें इस्लाम में यकसानियत” जैसे टाइटल की कई किताबें मिली हैं। पुलिस ने जब ये पूछा कि पाकिस्तानी किताबें कहां से आईं, इस पर सिंडिकेट के मेंबर कोई जवाब नहीं दे पाए।
मदरसे के नाम पर देशभर से जुटाया चंदा अब्दुल अजीज के कुल 5 बैंक खाते मिले हैं। इसमें सिर्फ एक खाते में ही 8 महीने के भीतर ही तकरीबन 13 लाख रुपए का लेनदेन है। कुल करीब 2 हजार ट्रांजैक्शन पाई गई हैं। सलमान के 12 बैंक खाते हैं। जबकि अन्य दो आरोपियों आरिफ और फहीम के दो–दो बैंक खाते मिले हैं। इन सभी के खातों में छोटी–छोटी रकम 100–200 रुपए पूरे देश से आई है। पुलिस का कहना है कि 21 खातों में आए पैसे की जांच चल रही है, इसलिए कुल रकम का अभी पता नहीं चल सका है।पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गैंग बरेली के मदरसे के लिए चंदा जुटाने के नाम पर पूरे देश में घूमता था। चंदे की अपील करने के लिए ये बल्क में मोबाइल मैसेज भी भेजते थे। इसी कारण देशभर से छोटी–छोटी धनराशि इनके खातों में आई है। हालांकि, विदेश से फंड आने की अब तक पुष्टि नहीं हुई है।
बदायूं से बरेली तक – क्या हर जिले में फैला नेटवर्क?
स्वदेश केसरी ने कुछ दिन पहले बदायूं के इस्लामनगर क्षेत्र में भी इसी तरह के गिरोह का खुलासा किया था। अब बरेली में हुए भंडाफोड़ ने चिंता बढ़ा दी है – क्या ऐसे गिरोह हर जिले में सक्रिय हैं और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं?
क्या केवल गिरफ्तारी काफी है?
केवल गिरफ्तारी करना समस्या का हल नहीं है। जब तक इन गिरोहों की फंडिंग, ट्रेनिंग और मास्टरमाइंड्स का पता नहीं चलता, तब तक ये फिर से सक्रिय हो जाएंगे।
प्रशासन और सरकार पर उठे सवाल
योगी सरकार की सख्त छवि के बावजूद ऐसे नेटवर्क का पनपना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। केंद्र सरकार पर भी सवाल है – क्या खुफिया एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं या सिर्फ आतंकवाद और नक्सलवाद तक ही सीमित हैं?केंद्र मे मोदी सरकार और राज्य मे योगी सरकार के रहते भी ऐसे संगठित धर्मांतरण नेटवर्क का चलना चिंता का विषय है। यदि सख्त प्रशासन में भी ये गिरोह नहीं रुक रहे, तो दूसरी सरकारों में इनकी गति और भी तेज होने की संभावना है।
राष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेशन की मांग
स्वदेश केसरी का मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही समाधान नहीं है। इन गिरोहों की जड़ों तक पहुंचने के लिए भारत सरकार के निर्देशन मे हर राज्य मे विशेष जांच एजेंसी गठित करनी चाहिए। जैसे भारत ने सीमापार आतंकवाद को खत्म करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, वैसे ही देशभर में गोपनीय ऑपरेशन चलाकर धर्मांतरण सिंडिकेट का सफाया किया जाना चाहिए। जैसे भारत ने सीमापार आतंकवाद पर विशेष ऑपरेशन चलाए, उसी तरह देशव्यापी “ऑपरेशन धर्मरक्षक” चलाकर इन गिरोहों को जड़ से खत्म किया जाए।सिर्फ गिरफ्तारियां नहीं, जड़ तक कार्रवाई जरूरी


























