बदायूं। बिनावर थाने के प्रभारी एसआई राजेंद्र सिंह का विवादित ऑडियो सामने आने के बाद पुलिसिंग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ऑडियो में वे पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा से कहते सुने गए – “हम आदमियों के लिए हैं, पशुओं के लिए नहीं।”

मेनका गांधी ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए एसएसपी डॉ. ब्रजेश सिंह से बात की और पशु बाजार बंद कराने तथा लाइसेंस निरस्त करने की पैरवी की।

बयान ने खड़ा किया बड़ा सवाल

एक स्थानीय अखबार ने जब उनसे इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगा तो थाना प्रभारी ने कहा कि “पशुओं के लगने वाले बाजार से प्रशासन को रेवेन्यू मिलता है, इसलिए हम नहीं रोक सकते।”
यह बयान पुलिस की संवेदनशीलता और ट्रेनिंग पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। क्या केवल राजस्व के लिए पशुओं पर क्रूरता होने दी जाएगी? एक थाना प्रभारी जैसे अहम पद पर बैठे व्यक्ति के इस व्यान को प्रदेश के मुख्यमंत्री और डीजीपी को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए,

कार्रवाई की मांग तेज

समाज में यह चर्चा है कि या तो थाना प्रभारी को पुलिसिंग की उचित ट्रेनिंग नहीं मिली है, या उन्हें किसी बड़े नेता के संरक्षण में यह पद मिला है। कई लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे अधिकारियों को जनसंपर्क जैसे कार्यों से हटाकर पुलिस लाइन भेजा जाए या दोबारा ट्रेनिंग दी जाए।

मेनका गांधी का हस्तक्षेप

पीपुल्स फॉर एनिमल्स (PFA) के अध्यक्ष विकेंद्र शर्मा ने इस प्रकरण की शिकायत डीजीपी, एडीजी बरेली जोन, डीआईजी बरेली रेंज और एसएसपी बदायूं से की थी।
मेनका गांधी ने विकेंद्र शर्मा को ईमेल द्वारा सूचित किया है कि इस मामले मे उन्होंने एसएसपी से तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।

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