बदायूं। शहर के चौबे मोहल्ला से सोमवार शाम लापता हुआ 8 वर्षीय बच्चा रघु शर्मा अंततः मंगलवार सुबह सुरक्षित अपने घर लौट आया। यह संभव हो सका एक जागरूक नागरिक, स्थानीय लोगों और मीडिया की सक्रिय भूमिका से।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे को घरवालों द्वारा डांटने और मारने का डर था, जिससे वह सोमवार शाम करीब 7 बजे घर से भाग गया। देर रात वह एक अज्ञात व्यक्ति को बिरुआबाड़ी मंदिर के पास मिला। बातचीत में बच्चे ने अपना नाम और घर का पता कूचा पंडा क्षेत्र में बताया। जब वह व्यक्ति बच्चे को घर ले जाने लगा, तो उसने डर के मारे मना कर दिया और बोला, “मैं घर नहीं जाऊंगा, घर वाले मारेंगे।”
उस भले व्यक्ति ने मानवीय भावनाओं के साथ बच्चे को रात अपने घर पर रखा और सुबह होते ही उसे लेकर कूचा पंडा इलाके में पूरन हलवाई की दुकान के पास पहुंचा। वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने जब बच्चे को देखा, तो सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से वायरल हो चुकी तस्वीरों के आधार पर उसे पहचान लिया। इसके बाद परिजनों को सूचना दी गई और बच्चा सकुशल घर पहुंचा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों के साथ माता-पिता को किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। घर की डांट-फटकार यदि डर का रूप ले ले तो बच्चा गलत कदम उठाने को मजबूर हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने जहां मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया, वहीं मीडिया और सोशल मीडिया की भूमिका भी इस मामले में अत्यंत सकारात्मक रही।
संदेश: आज के दौर में अभिभावकों को यह समझने की जरूरत है कि डांट के बजाय संवाद और स्नेह के माध्यम से ही बच्चों को सही दिशा दी जा सकती है। डर नहीं, समझदारी ही बच्चों की सुरक्षा और मानसिक मजबूती का आधार बन सकती है।


























