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बदायूं: स्वास्थ्य विभाग मे बिना पद के ही कर रहे जिम्मेदार काम, जिला कार्यक्रम प्रबंधक कमलेश शर्मा पर गंभीर आरोप; दो बार जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं

बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग को लेकर जिले में गंभीर मामला सामने आया है। शिकायती पत्र और सरकारी अभिलेखों के अनुसार कमलेश कुमार शर्मा जो वर्तमान में बदायूं जिले में कार्यरत हैं, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) के पद पर रहते हुए गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों में पूर्व में शाहजहांपुर में जांच के बाद दोषी पाए जा चुके हैं, फिर भी वह बदायूं में बिना किसी अधिकृत नियुक्ति के DPM का कार्यभार संभाले हुए हैं।

पूर्व में दोषी करार, फिर भी पदभार जारी

7 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र (पत्रांक 141/एसपीएमयू/डैप-एचआर/कमलेश शर्मा/2018-19/11486) के अनुसार शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान तीन सदस्यीय जिला स्तरीय जांच समिति ने कमलेश शर्मा को भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध क्रियाकलापों में दोषी पाया था। समिति में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), और वरिष्ठ कोषाधिकारी शामिल थे।

जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि

  • श्री शर्मा ने विभागीय समिति गठित कर अपने पिता की फर्म को फर्नीचर आपूर्ति हेतु न्यूनतम दर दिखाकर ठेका दिलवाया।
  • फर्जी तरीके से धनराशि की मांग की गई।
  • आचरण राजकीय सेवा नियमों के प्रतिकूल था और सरकारी छवि को नुकसान पहुंचाया।
    इन सभी के चलते उन्हें लिखित चेतावनी और सेवा समाप्ति का नोटिस भी जारी किया गया था।

बदायूं में फिर कर रहे वही कार्य

शिकायती पत्र के अनुसार, बदायूं में उनके पास कोई अधिकृत जिला कार्यक्रम प्रबंधक का पदभार नहीं है, इसके बावजूद वह संविदा कर्मियों की नियुक्ति पत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और 19 दिसंबर 2024 तक डॉक्टरों की भर्ती सूची भी उन्होंने जारी की, जबकि वह अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। नियमानुसार यह सूची आरसीएच नोडल अधिकारी द्वारा जारी होनी चाहिए थी।

इसके साथ ही 13 मार्च 2021 को एक वीडियो में वह तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी से फोन पर बातचीत में कथित रूप से कमीशन की मांग करते हुए पाए गए, जिसकी जांच जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति कर चुकी है।

सीएचओ प्रकरण में भी गंभीर आरोप

कमलेश शर्मा पर महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) द्वारा भी गंभीर यौन उत्पीड़न और अभद्रता के आरोप लगाए गए थे, जिसके विरोध में धरना प्रदर्शन हुआ। बाद में उनसे सीएचओ कार्यक्रम का चार्ज हटा लिया गया।

वसूली, ट्रांसफर और आतंक का माहौल

शिकायतकर्ता प्रताप सिंह (निवासी: ए-273, आवास विकास, बदायूं) द्वारा दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि श्री शर्मा बदायूं जिले में डॉक्टरों, कर्मचारियों और ठेकेदारों से अधिकारियों के नाम पर वसूली कर रहे हैं, और सुविधा शुल्क न देने पर भुगतान और ट्रांसफर अटका देते हैं। इससे जिले में भय और आतंक का वातावरण बन गया है।

मांग: जिला स्तरीय समिति से जांच कराई जाए

शिकायती पत्र में जिलाधिकारी बदायूं से आग्रह किया गया है कि एक स्वतंत्र जिला स्तरीय जांच समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।प्रतिलिपि मंडलायुक्त बरेली, मिशन निदेशक NHM लखनऊ, और अपर निदेशक स्वास्थ्य बरेली को भी भेजी गई है।

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