


बदायूं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को मर्ज (विलय) करने के आदेश के खिलाफ बदायूं जनपद में विरोध तेज़ हो गया है। शनिवार को जिले के 15 विकास क्षेत्रों में स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर इस आदेश के विरोध में ग्राम प्रधानों, विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) अध्यक्षों, शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों और अभिभावकों की संयुक्त बैठकें आयोजित हुईं।
बैठकों में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश पर विरोध दर्ज किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। इस दौरान जनपद भर से आये शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, अभिभावकों और समिति सदस्यों ने शासनादेश को छात्रविरोधी, अव्यवहारिक और ग्रामीण शिक्षा के लिए घातक करार दिया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 39 विद्यालयों के मर्जर का आदेश दिया
बदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा जिले के कुल 39 विद्यालयों को मर्ज करने की सूची जारी की गई है। इन विद्यालयों में छात्र संख्या 50 से कम है।इस निर्णय से छात्रों की पढ़ाई, शिक्षक नियुक्तियों और स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई।
ग्राम प्रधानों और SMC अध्यक्षों का विरोध
बैठकों में शामिल सभी 39 गांवों के ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष और ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने एकमत होकर इस आदेश को शिक्षा के अधिकार और ग्राम विकास के विरुद्ध बताया।
उन्होंने एलान किया कि अगर यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे धरना, प्रदर्शन और जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। विरोध स्वरूप उन्होंने जमीनी स्तर पर मर्जर प्रक्रिया को सफल न होने देने की शपथ भी ली।
बैठकों में उठे मुख्य मुद्दे
- मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के बच्चों को दूसरे गांव के स्कूलों तक भेजना असुरक्षित और असुविधाजनक है।
- इससे विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं की शिक्षा प्रभावित होगी, क्योंकि कई माता-पिता उन्हें दूर नहीं भेजना चाहते।
- शिक्षक कम हो जाएंगे और स्कूलों पर बोझ बढ़ेगा जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होगी।
- ग्रामीण क्षेत्रों की साक्षरता दर और विद्यालयों में नामांकन दर घटने की संभावना है।
विरोध में मौजूद रहे ये प्रमुख पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि
बैठकों में सभी विकास क्षेत्रों के ब्लॉक अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष, संघर्ष समिति के सदस्य, संबंधित गांवों के ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष, अभिभावक और सैकड़ों ग्रामवासी उपस्थित रहे।इस अवसर पर यह भी कहा गया कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो शिक्षक संघ के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
बदायूं जिले में शिक्षकों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की एकजुटता इस बात का संकेत है कि सरकारी आदेश बिना स्थानीय ज़रूरत और परिस्थितियों को समझे लागू किए गए हैं। शासन को इस विषय पर पुनः विचार करना चाहिए, अन्यथा यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।


























