बिल्सी (बदायूं)। नगर के नवनिर्मित रोडवेज बस स्टेशन के पीछे स्थित वार्ड नंबर 7, मोहल्ला नंबर दो की एक गली इन दिनों नारकीय स्थिति से गुजर रही है। पिछले तीन महीनों से नाली के पानी का निकास ठप है, जिससे पूरी गली दलदल में तब्दील हो चुकी है। दर्जनों गरीब परिवार घुटनों तक कीचड़ और पानी में निकलने को मजबूर हैं। न कोई स्थानीय स्तर का जनप्रतिनिधि सुनता है, न नगर पालिका की आंख खुलती है। शासन और प्रशासन की उदासीनता इस कॉलोनी के लिए अब अभिशाप बन चुकी है।

जनता की पीड़ा: विकास के नाम पर मिला दलदल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नया रोडवेज बस अड्डा ऊँचाई पर बना दिया गया, जबकि उसके पीछे की बस्ती को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। इसके चलते वहां की गली में पानी का कोई निकास नहीं बचा। नतीजतन, हल्की सी बारिश हो या बस स्टेशन की सफाई का पानी — सब कुछ उसी गली में भरकर कीचड़ और बदबू में तब्दील हो जाता है। तीन महीनों से स्थिति जस की तस है।

बेटी की शादी है, लेकिन घर में घुटनों तक कीचड़

पीड़ित परिवार विनोद कुमार ने रोते हुए स्वदेश केसरी न्यूज़ के सामने बताया कि उसकी बहन की शादी आगामी 19 जून को है, लेकिन घर के बाहर से लेकर दरवाजे तक गंदा पानी और कीचड़ भरा हुआ है। “मेहमान आएंगे कहां से, बहन की बारात कैसे निकलेगी… प्रशासन की नजर हम जैसे गरीबों पर क्यों नहीं जाती?” उसकी आंखों से झलकते आंसू प्रशासनिक व्यवस्था को आईना दिखा रहे थे।

पूर्व में एसडीएम ने किया था दौरा, फिर भी नहीं बदली तस्वीर

इससे पूर्व उपजिलाधिकारी बिल्सी द्वारा एक अन्य ऐसे ही मोहल्ले का निरीक्षण किया गया था जहां वर्षों से पानी भरा है और लोग ईंटें रख-रखकर निकलने को मजबूर हैं। मगर नगर पालिका की तरफ से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। यही स्थिति अब इस नई गली में बन गई है।

विधायक ने सुनी व्यथा, पर अभी तक नहीं हुआ समाधान

हाल ही में क्षेत्रीय विधायक हरीश शाक्य द्वारा रोडवेज बस स्टेशन का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने विधायक को अपनी पीड़ा सुनाई, जिस पर उन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन भी दिया। लेकिन आश्वासन के हफ्तों बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।

जनता का सवाल – क्या गरीबों की कोई सुनवाई नहीं?

वार्डवासियों का आरोप है कि नगर पालिका केवल मुख्य बाजार या प्रभावशाली लोगों के क्षेत्र में काम करती है, लेकिन गरीब और मध्यम वर्गीय कॉलोनियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। न कोई जनप्रतिनिधि मिलता है, न पार्षद सुनते हैं और न पालिका के अधिकारी।

मांग:

  1. गली से पानी निकासी के लिए तत्काल पाइप लाइन/नाला निर्माण किया जाए।
  2. पीड़ित परिवारों को अस्थायी राहत देने के लिए नगर पालिका की ओर से पंप लगाकर पानी निकाला जाए।
  3. जिन घरों में शादी या अन्य पारिवारिक कार्यक्रम हैं, वहां प्राथमिकता से सहायता दी जाए।
  4. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग है कि इस मामले में संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करें और स्थायी समाधान सुनिश्चित कराएं।

यह घटना केवल एक गली या मोहल्ले की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की तस्वीर है, जिसमें गरीबों की आवाज मक्कारखाने में बैहरी बनकर रह जाती है। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन और नगर पालिका इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देगा या यह मामला भी सिर्फ आश्वासन की चादर में दबा रह जाएगा।

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