








बरेली/बदायूं। उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं की कथित शह पर चल रही अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड नाम की फाइनेंस कंपनी ने करीब 100 करोड़ रुपये का जबरदस्त घोटाला कर डाला है। बरेली और बदायूं ज़िलों में इस कंपनी के खिलाफ भारी आक्रोश फूट पड़ा है। शुक्रवार को जब कंपनी के दफ्तर बंद होने की खबर फैली, तो निवेशकों का गुस्सा फूट पड़ा। बरेली और बदायूं दोनों जगह सैकड़ों निवेशकों ने प्रदर्शन किया, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं थीं — कई तो फूट-फूटकर रो पड़ीं। आरोप है कि किसी ने ज़ेवर बेचकर पैसा लगाया तो किसी ने जमीन-जायदाद।
भाजपा नेता के घर का घेराव, नाम-पद हटवाए गए, पर नेता भूमिगत
कंपनी का निदेशक शशिकांत मौर्य और उसके भाई सूर्यकांत मौर्य, जो भाजपा बरेली महानगर में संगठन मंत्री भी हैं, घोटाले के केंद्र में हैं। बदायूं के कार्यालय को रातों-रात खाली कर दिया गया। वहीं बरेली में सिंधुनगर स्थित इनके आवास का निवेशकों ने घेराव किया। हंगामा इस कदर बढ़ा कि पुलिस को परिवार को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।
घेराव के बीच सूर्यकांत और शशिकांत ने अपने घर की दीवार से भाजपा पद वाले बोर्ड और नाम हटवा दिए। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया। सोशल मीडिया पर भाजपा और प्रधानमंत्री के साथ तस्वीरें साझा करने वाले ये नेता अब सामने नहीं आ रहे हैं।
बैंक से अधिक ब्याज का झांसा देकर जमा कराए करोड़ों, अब कंपनी गायब
करीब 30 साल से आरडी और एफडी पर बैंकों से ज़्यादा ब्याज का लालच देकर अमर ज्योति कंपनी ने हजारों लोगों से निवेश कराया। निवेशकों की मानें तो 15,000 से ज़्यादा लोगों ने कंपनी में पैसा लगाया था। अब एक साल से भुगतान अटका हुआ है और अचानक ऑफिस बंद कर दिया गया।
प्रशासनिक संवेदनहीनता: पुलिस रिपोर्ट लिखने से कतरा रही, नेता से डर?
बरेली और बदायूं की पुलिस शुरुआत में कार्रवाई से बचती रही। बारादरी थाने की पुलिस ने कहा कि मामला बदायूं का है, वहीं रिपोर्ट लिखवाओ। वहीं, बदायूं पुलिस के पास भी अब तक ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा नेताओं की ताकत और रसूख के कारण पुलिस हाथ बांधकर खड़ी है।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से सवाल: क्यों नहीं हो रही सीबीआई-ईडी से जांच?
इस घोटाले ने उत्तर प्रदेश की सियासत और कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब किसी सामान्य व्यक्ति पर हल्की शिकायत पर भी त्वरित कार्रवाई होती है, तो फिर भाजपा पदाधिकारियों पर सीबीआई और ईडी की जांच क्यों नहीं हो रही है?
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे घोटालों पर मौन रहेंगे? क्या सत्ता का दुरुपयोग करके आम जनता को ठगने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी?
निवेशकों की चीख-पुकार: “हमारी जिंदगी की कमाई चली गई, कौन देगा जवाब?”
बरेली में प्रदर्शन कर रही एक महिला ने बताया, “हमने बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़े थे, अब सब डूब गया।” एक अन्य बुजुर्ग ने कहा, “यह घोटाला नहीं, गरीबों की हत्या है।”
इस घोटाले में शामिल सभी भाजपा नेताओं पर त्वरित और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जनता को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई और ईडी को तत्काल कार्रवाई में लगाया जाए। वरना यह मामला सिर्फ एक घोटाले का नहीं, बल्कि व्यवस्था और जनविश्वास के पतन का प्रतीक बन जाएगा।


























