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बदायूं में मनरेगा घोटाले की आहट: एक एपीओ 10 वर्षों से तैनात, तीन ब्लॉकों की जिम्मेदारी से उठे सवाल, पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य ने की सीडीओ से शिकायत

बदायूं। जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना में भारी भ्रष्टाचार की आशंका ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भगवान सिंह शाक्य ने इस संदर्भ में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) से शिकायत की है, जिसमें एक सहायक परियोजना अधिकारी (एपीओ) के एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने और तीन ब्लॉकों का कार्यभार संभालने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

श्री शाक्य ने सीडीओ को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि एपीओ विनोद कुमार गंगवार बीते 10 वर्षों से बदायूं जिले के म्याऊं और उसावां विकास खंडों में लगातार तैनात हैं। इतना ही नहीं, बीते तीन वर्षों से वे जिला मुख्यालय के कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। एक ही अधिकारी के पास इतने लंबे समय तक तीन महत्वपूर्ण स्थानों का कार्यभार होने से भ्रष्टाचार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ग्राम विकास विभाग, लखनऊ के आयुक्त ने पहले ही अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि किसी भी एपीओ का कार्यकाल एक ही विकास खंड में तीन वर्षों से अधिक नहीं होना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से निष्पक्षता की उम्मीद कम हो जाती है और इससे योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।

पूर्व मंत्री शाक्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह तैनाती नियमों के विरुद्ध है और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने सीडीओ से मांग की है कि एपीओ विनोद कुमार गंगवार का तत्काल म्याऊं और उसावां विकास खंड से स्थानांतरण कर जांच कराई जाए।

सीडीओ केशव कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

इस मामले ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, और सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर क्यों एक ही अधिकारी को इतने वर्षों से एक ही स्थान पर बनाए रखा गया? क्या इसके पीछे कोई संगठित तंत्र कार्य कर रहा है, या यह केवल लापरवाही है? इन सवालों के जवाब अब जिले के प्रशासनिक अमले को देने होंगे।

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