




बदायूं। शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को नमन करते हुए पंजाबी समाज सेवा समिति ने रविवार को शहीद भगत सिंह चौक पर एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। समिति के सभी सदस्य प्रातः 9:00 बजे एकत्रित हुए और तीनों वीर क्रांतिकारियों को नमन करते हुए दो मिनट का मौन धारण कर उनकी शहादत को याद किया। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष श्री अशोक नारंग ने बताया कि ब्रिटिश हुकूमत ने इन तीनों क्रांतिकारियों को 24 मार्च 1931 को फांसी देने का निर्णय लिया था, लेकिन जनाक्रोश को देखते हुए अंग्रेजों ने उन्हें एक दिन पहले ही, यानी 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी थी।
शहीदों के सम्मान में भारत सरकार से की यह महत्वपूर्ण मांग
समिति के महासचिव राजेंद्र अनेजा ने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों के बलिदान को अमर बनाए रखने के लिए भारत सरकार को बड़े रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और प्रमुख संस्थानों का नाम उनके नाम पर रखना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों से प्रेरित होकर राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित हो सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के इस संघर्ष में दिए गए बलिदान को इतिहास में और अधिक सम्मान देने की आवश्यकता है।
क्रांतिकारियों के जीवन पर डाली गई रोशनी
इस अवसर पर समिति के अन्य सदस्यों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे इन तीनों युवाओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की स्वतंत्रता की नींव को मजबूत किया। भगत सिंह की विचारधारा, उनकी जेल डायरी और उनके द्वारा लिखे गए पत्रों का विशेष उल्लेख किया गया, जिससे उनकी सोच और बलिदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े।
श्रद्धांजलि सभा में शामिल गणमान्य सदस्य
इस कार्यक्रम में पंजाबी समाज सेवा समिति के कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें श्री अशोक नारंग, राजेंद्र अनेजा, गुरदीप सिंह, हरभजन सिंह, उमेश अरोड़ा, सुनील सम्राट, अनिल जटवानी, नवनीत प्रताप सिंह, रूपेंद्र सिंह, मोनू मिनोचा, अमित गांधी, विशाल दीवान सहित अन्य समाजसेवी शामिल रहे।
समिति के सदस्यों ने इस मौके पर संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए समाज में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेंगे और राष्ट्रहित में कार्य करते रहेंगे।


























