बदायूं से प्रदीप कुमार शर्मा बिल्सी से ललित वार्ष्णेय की रिपोर्ट
बदायूं।बिल्सी में सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले दरिंदे को अदालत ने फांसी की सजा सुनाकर ऐतिहासिक फैसला दिया है। महज चार महीने में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई, जिससे यह मामला न्यायपालिका की तेजी का मिसाल बन गया। परिवार ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया और कहा कि इससे समाज में सही संदेश जाएगा।




अदालत में सुनवाई: जज ने पूछा— कोई अफसोस है?
अपर सत्र न्यायाधीश एवं स्पेशल जज पोक्सो एक्ट दीपक यादव की अदालत ने आरोपी जानेआलम को दोषी करार दिया और आज फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने गुनाह साबित होने के बाद आरोपी से पूछा कि क्या उसे अपने किए पर अफसोस है? इस पर उसने सिर झुकाकर जवाब दिया— “हां, मुझे अपने किए पर अफसोस है।”
पिता ने कहा— फैसले से संतुष्ट, अब बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी
फैसले के बाद बच्ची के पिता ने कहा, “कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई, इससे हम पूरी तरह संतुष्ट हैं। मेरी बेटी को वापस नहीं ला सकते, लेकिन इस फैसले से उसकी आत्मा को शांति मिलेगी। इससे बड़ा और क्या हो सकता है?”
कैसे हुआ था मामला?
विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी ने बताया कि यह वारदात 18 अक्टूबर 2024 को बिल्सी थाना क्षेत्र में हुई थी।
- कस्बे में रहने वाली सात साल की मासूम कक्षा तीन की छात्रा थी।
- घटना वाले दिन दोपहर करीब 1 बजे वह सब्जी लेने घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी।
- रात 10 बजे उसका शव कस्बे के ही एक खंडहरनुमा मकान में मिला।
- कपड़े अस्त-व्यस्त थे, गले और चेहरे पर चोट के निशान थे।
- पुलिस ने मामला दर्ज कर दुष्कर्म, हत्या और पोक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
सीसीटीवी ने खोला राज, रात में ही पकड़ा गया दरिंदा
घटना वाली रात ही पुलिस ने आसपास के 100 के आसपास सीसीटीवी कैमरे खंगाले। फुटेज में जानेआलम बच्ची को अपने साथ ले जाता दिखा।
- रात में ही पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और मुठभेड़ के बाद उसे पकड़ लिया।
- मुठभेड़ में जानेआलम के पैर में गोली लगी, जबकि एक सिपाही भी घायल हुआ।
- उसके पास से तमंचा और कारतूस बरामद किए गए।
- पूछताछ में उसने गुनाह कबूल कर लिया और बताया कि घटना से पहले उसने शराब पी थी और नशे में था।
दरिंदगी से पहले मासूम ने मांगी थी मदद
जिस गली से बच्ची गुजर रही थी, वहां कुछ बंदर बैठे थे। मासूम ने जानेआलम से बंदरों से बचाने और गली पार कराने के लिए मदद मांगी थी। लेकिन उसी समय आरोपी के मन में दरिंदगी का ख्याल आया और उसने मासूम के भरोसे का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे दिया।
इतनी तेजी से कैसे हुआ ट्रायल?
- पुलिस ने तेजी से जांच कर चार्जशीट दाखिल की।
- कोर्ट ने प्राथमिकता देते हुए लगातार सुनवाई की।
- महज 4 महीने में ही मुकदमा पूरा हुआ और फैसला सुना दिया गया।
न्याय की जीत, समाज के लिए मिसाल
बिल्सी में अदालत का यह फैसला समाज में एक मजबूत संदेश देगा। परिजनों का कहना है कि “अगर ऐसे मामलों में तेजी से न्याय मिले, तो समाज में अपराध कम होंगे।”
बिल्सी की जनता ने फैसले को सराहा
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद बिल्सी में लोगों ने अदालत के न्याय को सराहा और प्रशासन की कार्यशैली की तारीफ की।


























