बदायूं। बिल्सी तहसील के उघैती थाना क्षेत्र में न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एक युवक पर पहले छेड़खानी और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा केस दर्ज कराने का आरोप लगा, फिर जब उसने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, तो सीओ बिल्सी उमेश चंद्र, उघैती थानाध्यक्ष कमलेश कुमार और हल्का प्रभारी रविंद्र सिंह ने उसकी शिकायत पर ध्यान देने के बजाय उल्टा उस पर और भी गंभीर मामले दर्ज करवा दिए।
झूठे केस का आरोप, मदद के नाम पर फंसाने की साजिश
पीड़ित युवक के अनुसार, एक युवती ने पहले थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले दिन जब वह सीओ बिल्सी उमेश चंद्र से मिला, तो उन्होंने उसे दिलासा दिया कि वह जल्द रिटायर होने वाले हैं और उसकी मदद हो जाएगी। लेकिन इसके बाद युवती ने पुलिस की शह पर एससी-एसटी एक्ट के तहत छेड़खानी की एक और रिपोर्ट दर्ज करा दी।
यही नहीं, इस मामले की विवेचना भी सीओ बिल्सी को ही सौंप दी गई। जब पीड़ित युवक की मां ने इस पर पुलिस अधिकारियों से शिकायत की, तो सीओ नाराज हो गए और एक और झूठी रिपोर्ट उघैती थाने में दर्ज करा दी।
पीड़ित पर दो बार हुआ जानलेवा हमला
पीड़ित युवक ने अदालत में बताया कि आठ जनवरी को वह अपनी मां के साथ अस्पताल से लौट रहा था, तभी रास्ते में गांव के भगवान सिंह, आकेश, गोविंद, प्रेम, विकास और बॉबी समेत कुछ अज्ञात लोगों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने तुरंत सीओ, थानाध्यक्ष और हल्का प्रभारी को सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद 19 जनवरी को दोबारा उन पर हमला हुआ। आरोपियों ने मां पर फायरिंग की, उन्हें तमंचे की बट से पीटा और 50 हजार रुपये, आधार कार्ड, चेकबुक, घर की चाबियां समेत अन्य सामान लूटकर फरार हो गए।
अदालत ने दिया मुकदमा दर्ज करने का आदेश
इस मामले में पुलिस की लापरवाही और मिलीभगत पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष को आदेश दिया कि सीओ बिल्सी, उघैती इंस्पेक्टर, हल्का प्रभारी समेत अन्य के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की जाए।
अब देखना यह होगा कि अदालत के आदेश के बाद पुलिस महकमा क्या कार्रवाई करता है, या फिर इस मामले को भी दबाने की कोशिश की जाती है।


























