
म्याऊं, 16 दिसंबर।
ब्लॉक संसाधन केंद्र, म्याऊं में आज समावेशी शिक्षा हेतु आयोजित पांच दिवसीय नोडल शिक्षकों का प्रथम चरण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में 77 शिक्षक और शिक्षिकाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में सुधार और उनके लिए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाना था।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य
प्रशिक्षण में दिव्यांगता के प्रकार, उनके कारण और निवारण पर चर्चा की गई। इसमें श्रवण बाधित, दृष्टिबाधित, बौद्धिक रूप से अक्षम और विशिष्ट अधिगम दिव्यांग बच्चों के कक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
- श्रवण बाधित बच्चों के लिए साइन लैंग्वेज में पढ़ाने के तरीके समझाए गए।
- दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल लिपि पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।
- दिव्यांग बच्चों के लिए शैक्षिक पुनर्वास, अधिगम सामग्री और अभिभावकों को परामर्श देने पर चर्चा की गई।
खंड शिक्षा अधिकारी का संदेश
समापन समारोह में खंड शिक्षा अधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण जी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, “इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को विद्यालय तक ले जाएं और दिव्यांग बच्चों को उनका लाभ पहुंचाएं। उनकी शिक्षा और विकास में यह प्रशिक्षण मील का पत्थर साबित होगा।”
प्रशिक्षण टीम और सहयोग
यह प्रशिक्षण स्पेशल एजुकेटर अरुण कुमार, राजीव कुमार और आशीष सिंह द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण में एआरपी श्री वीरपाल सिंह और श्री भानु प्रताप तिवारी का विशेष सहयोग रहा।
प्रतिभागी शिक्षकों की सूची
इस कार्यक्रम में सुलक्षणा देवी, योग्यता कुमारी, राजेश राठौर, हरीश दिनकर, जिज्ञासा सक्सेना, अब्दुल रहीम, मोहम्मद मुक्तदिश, और मंसूर आजम समेत कई शिक्षकों ने भाग लिया।
यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि दिव्यांग बच्चों के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता को बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी साबित हुआ।

























