संभल। जामा मस्जिद में रविवार सुबह हुए सर्वे के दौरान भारी बवाल हो गया। सर्वे टीम के पहुंचते ही वहां इकट्ठा हुई भीड़ ने पथराव और आगजनी शुरू कर दी। हालात इतने बेकाबू हो गए कि पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस दौरान उग्र भीड़ ने एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया।






घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संभल प्रशासन ने आसपास के कई थानों से अतिरिक्त फोर्स बुला ली। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण बिश्नोई स्वयं मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
कैसे भड़की हिंसा?
रविवार सुबह करीब 6 बजे डीएम-एसपी और सर्वे टीम जामा मस्जिद पहुंची। टीम में हिंदू पक्ष के वकील, सरकारी वकील, और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। सर्वे के दौरान स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
- सुबह का समय: लोगों ने सुबह-सुबह सर्वे पर आपत्ति जताई।
- भीड़ का जुटान: कुछ ही समय में मस्जिद के बाहर लगभग एक हजार लोग इकट्ठा हो गए।
- पथराव और भगदड़: भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिससे भगदड़ जैसे हालात बन गए।
- आगजनी: उग्र भीड़ ने पुलिस का एक वाहन फूंक दिया।
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
सुरक्षा के बावजूद क्यों बिगड़े हालात?
प्रशासन ने पहले से ही पीएसी और आरआरएफ को तैनात कर रखा था। बावजूद इसके, जैसे ही सर्वे टीम मस्जिद के अंदर गई, बाहर मौजूद भीड़ ने उग्र रूप ले लिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद संभल की शाही जामा मस्जिद के हिंदू मंदिर, श्री हरिहर मंदिर, होने के दावे से जुड़ा है।
- हिंदू पक्ष का दावा: हिंदू पक्ष ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए दावा किया है कि मस्जिद 1529 में बाबर के शासनकाल में एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।
- कोर्ट का आदेश: 19 नवंबर को कोर्ट ने मस्जिद का सर्वे कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
- पहला सर्वे: कोर्ट के आदेश के बाद 19 नवंबर को ही प्रशासन ने पहली बार मस्जिद का सर्वे किया था।
- दूसरा सर्वे: रविवार को सर्वे टीम फिर से मस्जिद पहुंची थी, जिसके दौरान यह हिंसा भड़क गई।
सर्वे टीम में कौन-कौन था?
- हिंदू पक्ष के वकील: विष्णु शंकर जैन
- सरकारी वकील: प्रिंस शर्मा
- प्रशासनिक अधिकारी: डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया, एसपी कृष्ण बिश्नोई, और एसडीएम
- सुरक्षा व्यवस्था: पीएसी और आरआरएफ की टीमें
स्थिति पर नजर
प्रशासन ने हालात को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।
- BNS की धारा 165 लागू: शहर में धारा 165 लागू कर दी गई है।
- फोर्स अलर्ट: आसपास के जिलों से अतिरिक्त फोर्स मंगाई गई है।
- वरिष्ठ अधिकारी सतर्क: डीएम और एसपी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को है। प्रशासन को 26 नवंबर तक सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी है। फिलहाल, संभल में हालात तनावपूर्ण हैं, और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। यह घटना धार्मिक और सामुदायिक संवेदनशीलता से जुड़ी है। प्रशासन शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।

























