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बदायूं की डॉ. मेघा अग्रवाल ने बद्रीनाथ धाम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश देव दीपावली पर विमोचित हुई डॉ. मेघा अग्रवाल की पुस्तक “प्रकृति से परमात्मा की ओर”

बदायूं। देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पावन अवसर पर बदायूं की साहित्यकार डॉ. मेघा अग्रवाल ने अपनी नवीनतम पुस्तक “प्रकृति से परमात्मा की ओर” का विमोचन बद्रीनाथ धाम में कर एक अनूठी मिसाल पेश की। यह आयोजन शुक्रवार को पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और रावल अमरनाथ नंबूदरी के कर-कमलों से संपन्न हुआ। पवित्र बद्रीनाथ धाम में पुस्तक विमोचन के बाद डॉ. मेघा ने कहा कि यह स्थान उनकी पुस्तक के विचारों और उद्देश्यों को प्रकट करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि बद्रीनाथ धाम प्रकृति और अध्यात्म का संगम है।

डॉ. मेघा का पर्यावरण और साहित्य के प्रति समर्पण

डॉ. मेघा अग्रवाल न केवल एक प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा और कछला स्थित भागीरथी तट पर होने वाली गंगा आरती के क्षेत्र में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वह नियमित रूप से कछला भागीरथ घाट पर होने वाली गंगा आरती में सहभागिता करती हैं और समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। उनकी पुस्तक “प्रकृति से परमात्मा की ओर” भी इसी उद्देश्य पर आधारित है, जो पाठकों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और इसके महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती है।

लेखन और समाज सेवा में पहचान

डॉ. मेघा की रचनाएं देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों में प्रकाशित होती हैं। उनकी लेखनी सरल, प्रभावशाली और समाज को जागरूक करने वाली है। पर्यावरण संरक्षण और अध्यात्म के प्रति उनके विचार उन्हें अन्य लेखकों से अलग बनाते हैं। उनके इस अनमोल योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय शक्ति शिरोमणि सम्मान, निधि साहित्य सम्मान, विद्या-वाचस्पति सम्मान सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

बद्रीनाथ धाम का चयन: प्रेरणा का केंद्र

पुस्तक विमोचन के लिए बद्रीनाथ धाम को चुनने का निर्णय लेखिका की गहरी सोच और प्रकृति से जुड़े उनके लगाव को दर्शाता है। डॉ. मेघा का मानना है कि बद्रीनाथ जैसा पवित्र स्थल पुस्तक के संदेश को गहराई से समझाने में सहायक है। विमोचन समारोह में मौजूद अतिथियों ने भी उनकी इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

पुस्तक का सार और संदेश

“प्रकृति से परमात्मा की ओर” पुस्तक न केवल पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, बल्कि यह प्रकृति और परमात्मा के बीच के गहरे संबंध को उजागर करती है। डॉ. मेघा ने पुस्तक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि प्रकृति का संरक्षण केवल हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिकता तक पहुंचने का माध्यम भी है। पुस्तक हमें प्रेरित करती है कि हम जल, वायु, और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का आदर करें और इनका संतुलन बनाए रखें।

बदायूं का गौरव

डॉ. मेघा अग्रवाल ने अपनी लेखनी और समाज सेवा के जरिए बदायूं को एक विशेष पहचान दिलाई है। उनकी इस पुस्तक विमोचन और बद्रीनाथ धाम से मिले संदेश ने न केवल साहित्य प्रेमियों को, बल्कि पूरे समाज को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक किया है।

डॉ. मेघा अग्रवाल का यह प्रयास बदायूं के लिए गर्व की बात है। उनके इस सराहनीय कदम के लिए समाज के सभी वर्गों ने उन्हें बधाई दी है

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