बिल्सी: मंत्री जी के नाम से मशहूर जितेंद्र वार्ष्णेय उर्फ जित्तन उर्फ मंत्री जी का रामलीला महोत्सव से गहरा और पुराना नाता है। स्वदेश केसरी के साथ आज एक विशेष साक्षात्कार में मंत्री जी ने अपने जुड़ाव की यात्रा को साझा किया, जो लगभग पांच दशकों से रामलीला मंचन और सामाजिक कार्यों में उनकी उल्लेखनीय भूमिका की कहानी है। वर्ष 1974 से जुड़े मंत्री जी ने बताया कि उन्होंने रामलीला कमेटी में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए रामलीला महोत्सव को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने का लगातार प्रयास किया है। शुरुआती दौर में उन्होंने एक वर्ष के लिए अध्यक्ष पद भी संभाला, तब रामलीला का मंचन नगर के मुख्य बाजार में हुआ करता था।
1980 और 90 के दशक में रामलीला का मंचन ग्राम रायपुर के निकट उस स्थान पर होने लगा, जहां वर्तमान मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। मंत्री जी बताते हैं कि 1980 से 1985 तक रामलीला कमेटी की जिम्मेदारी नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी लक्ष्मी नारायण वार्ष्णेय उर्फ दद्दा और ज्योतिषाचार्य पंडित लक्ष्मी नारायण दीक्षित के कंधों पर थी। उनके अथक प्रयासों से रामलीला आयोजन के लिए नगर पालिका द्वारा दी गई भूमि पर मंचन प्रारंभ हुआ, जिससे इस आयोजन को स्थिरता मिली।
आज के समय में यह महोत्सव सिर्फ एक रामलीला मंचन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र का वार्षिक मेला बन गया है। मंत्री जी ने बताया कि मौजूदा विधायक और चेयरपर्सन के संरक्षण में यह आयोजन अब नुमाइश का रूप ले चुका है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र से भारी भीड़ को आकर्षित करता है। हर वर्ष आयोजित होने वाले इस महोत्सव में लोग बड़े उत्साह के साथ आते हैं और इसे देखने के लिए बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।
धार्मिक गतिविधियों में मंत्री जी की विशेष रुचि है, और वे समाज के लिए अपना योगदान देने में विश्वास रखते हैं। इस रामलीला महोत्सव को सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्षों से लगातार सक्रिय रहने वाले मंत्री जी का यह समर्पण और जोश आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
साक्षात्कार के अंत में उन्होंने कहा, “रामलीला मेरे लिए एक मंच नहीं, बल्कि संस्कारों को जीवंत करने का एक माध्यम है। मेरे लिए रामलीला कमेटी से जुड़ा होना सम्मान और सौभाग्य की बात है, और मैं चाहता हूं कि यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों तक ऐसे ही सर्वदा चलता रहे।”

























