
बदायूं, 3 सितंबर: जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बदायूं में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई जब सर्प दंश के इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया। गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीज को बीती आधी रात में जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, लेकिन वहां भी उचित इलाज न मिलने पर उसे बरेली मिशन अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां सुबह 3:30 बजे उसकी हालत में सुधार आया।
शिकायतकर्ता, जो एक पशु प्रेमी हैं, ने CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) से इस लापरवाही की शिकायत की। इसके जवाब में CMS ने तंज कसते हुए कहा, “पहले MBBS करके आओ, तब बताना इलाज।” CMS के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
CMS का यह तंज न केवल उनके असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है, बल्कि जिला अस्पताल की काबिलियत पर भी सवाल खड़ा करता है। क्या CMS का इस प्रकार का जवाब देना उचित है? क्या सर्प दंश जैसी गंभीर स्थिति में मरीज को उचित इलाज के बजाय रेफर कर देना ही समाधान है?
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके और इस तरह की लापरवाही को रोका जा सके। साथ ही, यह मांग की जा रही है कि CMS से पूछा जाए कि अगर वह MBBS करने के बाद भी सर्प दंश का इलाज नहीं कर सकते, तो फिर जिला अस्पताल में उनकी भूमिका क्या है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और मेडिकल स्टाफ की उदासीनता के कारण गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता। लोगों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाएं।

























