बिल्सी: यज्ञतीर्थ गुधनी में चल रही वेद कथा के द्वितीय दिवस में आचार्य संजीव रूप ने कहा कि बोलने से पहले तोलना आवश्यक है। वाणी ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जिसका सदुपयोग करने से हम विजयी, स्वस्थ, और सुखी हो सकते हैं, जबकि दुरुपयोग करने पर पराजित, रोगी, और दुखी हो सकते हैं।
आचार्य संजीव रूप ने वेद मंत्रों की व्याख्या करते हुए बताया कि भगवान चाहता है कि हम सभी विनम्र बनें। छोटी-छोटी बातों पर बुरा मानना और गलत व्यवहार करना नास्तिकता की निशानी है। यदि कोई हमें गाली देता है या हमारा अहित करता है, तो समझना चाहिए कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है। प्रेम रूपी औषधि से उसकी चिकित्सा की जा सकती है और उसे एक सदाचारी इंसान बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक वही है जो लोगों की दुआएं लेता है और बुरा करने वालों को भी दुआ देता है। कथा से पूर्व मास्टर साहब सिंह, ईशा आर्य, और कौशिकी रानी ने भजन गाए।
इस अवसर पर ओमवीर, किशनपाल आर्य, विश्वजीत आर्य, डॉ. विनीत कुमार सिंह, श्रीमती ज्योति रानी, गोपाल उपाध्याय, अनुज कठेरिया, सुखवीर सिंह, मनोज श्रीवास्तव सहित कई अन्य श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।














