साभार:विकेंद्र शर्मा (पशु प्रेमी )
बदायूं—बदायूं में हर दिन सड़कों पर हो रही गौवंशों की दुर्घटनाओं में उनकी मौतें और गंभीर चोटों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ताजा घटना बदायूं के थाना सिविल लाइन क्षेत्र के ग्राम कुलचौरा में शिव मंदिर के सामने घटी, जहां एक गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में उसकी कई हड्डियां टूट गईं।




एक अन्य घटना उझानी में हुई, जहां कल एक अज्ञात वाहन ने गौवंश को रौंद दिया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। स्वदेश केसरी ने कल भी इस घटना को अपनी खबर में प्रकाशित किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और शासन की निष्क्रियता पर सवाल उठते हैं।
गौवंश की दुर्दशा पर प्रशासन और हिंदू संगठनों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जो संगठन गौमाता के नाम पर राजनीति चमकाते हैं, वे इन घटनाओं को देखकर भी मौन बने हुए हैं। हर दिन मीडिया और सोशल मीडिया में इन दुर्घटनाओं की खबरें छपती हैं, लेकिन इनके बावजूद न तो प्रशासन की नींद टूट रही है और न ही हिंदू संगठनों की।
कुलचौरा में घायल गाय को रात में ही बदायूं के पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा द्वारा संचालित पशु पक्षी सेवा धाम गुरपुरी विनायक लाया गया, जहां उसका इलाज शुरू कर दिया गया है। इस सेवा धाम में कल रात 1 बजे भी एक घायल बंदर को चंदौसी से लाया गया था, जिसका इलाज जारी है।
इस स्थिति में यदि शासन, प्रशासन, हिंदू संगठन और समाजसेवी संस्थाएं पशु पक्षी सेवा धाम की मदद के लिए आगे आएं, तो इन बेजुबानों की मदद हो सकती है। लेकिन इस दिशा में कोई कदम न उठाए जाने से सवाल खड़े होते हैं कि आखिर इनकी मदद के लिए कौन आगे आएगा?
गौवंशों की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है? शासन, प्रशासन, या वे संगठन जो गौमाता के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन इनकी असली समस्या से मुंह मोड़ लेते हैं? यह एक ऐसा सवाल है जो सभी की आत्मा को झकझोरता है और तत्काल समाधान की मांग करता है।

























